द फॉलोअप डेस्क
उप राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत उप राष्ट्रपति का पद बहुत बड़े गरिमा का पद है। इसलिए उन्होंने अपनी अंतरआत्मा से इस पद का चुनाव लड़ने के लिए यूपीए का उम्मीदवार बना हूं। इसकी गरिमा बनी रहे, इसके लिए वह भाजपा के टॉप लीडरों का समय मिला तो उनसे भी समर्थन मांगने जाउंगा। क्योंकि हमारी संवैधानिक व्यवस्था में सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जस्टिस के अलावा भाईचारा और सम्मान(डिग्निटी) का बड़ा स्थान है। उन्हें कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का समर्थन तो मिल गया, फिर भी वह सांसदों से मिल कर समर्थन मांग रहे हैं। क्योंकि हमारे संवैधानिक व्यवस्था में पहले वोटर फिर नागरिकता का कंसेप्ट लाया गया है। जस्टिस रेड्डी आज सीएम हाउस में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से लगभग एक घंटे तक गुफ्तगू करने के बाद संयुक्त रूप से मीडिया कर्मियों से बातचीत कर रहे थे। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश, लोकसभा सदस्य रघुनाथ रेड्डी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणव झा के अलावा कई अलावा कई अन्य बड़े नेता उपस्थित थे। इसके अलावा झामुमो सांसद जोबा मांझी, महुआ माजी, सरफराज अहमद और कांग्रेस सांसद कालीचरण मुंडा और सुखदेव भगत के अलावा कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव भी उपस्थित थे। मीडिया कर्मियों से बातचीत के बाद जस्टिस रेड्डी आज ही दिल्ली लौट गए।

बहुमत का अर्थ यह नहीं कि सिर के बल चलने का कानून बना दें
जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि संख्या गणित ही काफी नहीं होता। बहुमत का यह अर्थ नहीं होता कि आप पत्रकारों के लिए एक कानून बना दें कि वह सिर के बल चलें। समग्रता में किसी विषय को देखने और उस पर कानून बनाने की जिम्मेदारी सर्वोपरि होती है।
हेमंत सोरेन की धूमिल हुई प्रतिष्ठा का जबाव नहीं मिलता, तब तक प्रजातंत्र का मतलब नहीं
रिटायर जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जिस तरह गिरप्तार किया गया, उन्हें सताया गया, जिस तरह का उनके साथ वर्ताव हुआ और उनकी प्रतिष्ठा धूमिल करने की कोशिश हुई, यह जगजाहिर है। लेकिन यह भी किसी व्यवस्था के तहत किया गया। इस व्यवस्था में एक पूरी व्यवस्था संलग्न रही। हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर टिप्पणी की। आरोपों को खारिज किया। अब सवाल यही है कि हेमंत सोरेन की धूमिल हुई प्रतिष्ठा के लिए जिम्मेवार कौन हैं, जब तक इस सवाल का जवाब नहीं मिल जाता, तब तक प्रजातंत्र का कोई मतलब नहीं है।
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वोटर लिस्ट पुनरीक्षण पर सवाल खड़ा किया
न्यायमूर्ति रेड्डी ने कहा कि भारत में लोग मतदाता पहले बने और उन्हें नागरिकता बाद में मिली। वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण होना चाहिए। लेकिन इसमें वोटर को हटाने और जोड़ने का जिस तरह से काम किया जा रहा है, इसे लोग देख रहे हैं। वोटर प्रथम हैं, इसीलिए उन्होंने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों को चिट्ठी लिखी है और समर्थन की मांग की है।
कई सवालों को टाल गए जस्टिस रेड्डी
संविधान के 130 वें संशोधन पर उन्होंने कहा कि अब इसे संसद की संयुक्त समिति को भेजा गया है। अब उसकी रिपोर्ट आने पर ही वह अपनी प्रतिक्रिया देंगे। उच्च एवं उच्चतम न्यायालय ने कॉलेजियम के माध्यम से जजों की नियुक्ति को लेकर पूछे गए सवाल को उन्होंने टाल दिया और कहा कि इसके लिए कभी बाद में बात करेंगे। जब उनसे यह पूछा गया कि जिस व्यक्ति ने राज्यपाल रहते हुए राजभवन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कराने का काम किया था, आज वह एनडीए की तरफ से उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार है तो उन्होंने कहा कि वह किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं करेंगे। यह पूछने पर कि अगर आज संवैधानिक व्यवस्था से इतर काम हो रहा है तो क्या सुप्रीम कोर्ट बौना हो गया है। इस पर उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट समीक्षा कर सकता है, फोर्स नहीं कर सकता, क्योंकि संसद सर्वोपरि है।

गुरुजी को जस्टिस रेड्डी ने दी श्रद्धांजलि
जस्टिस रेड्डी ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा उनका पूरा जीवन राज्य के निर्माण में लगा और उनके संघर्ष के कारण झारखंड बना। आज उन्हें वह सर्व प्रथम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
हमने आगे की बेहतर रणनीति बनाने पर विचार-विमर्श कियाः हेमंत सोरेन
इस मौके पर राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि उप राष्ट्रपति का पद खाली है और इसके चुनाव के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष तैयारी में जुटा है। इसी सिलसिले में जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी झारखंड आए। उनसे मेरी बातचीत हुई। जस्टिस रेड्डी सभी से व्यक्तिगत रूप से भी संपर्क कर रहे हैं। उन्हें यूपीए ने उम्मीदवार बनाया है और हम उनका पुरजोर स्वागत करते हैं। हम उन्हें कैसे विजयी बनाए, इसकी बेहतर रणनीति सुनिश्चित करने के लिए बैठक हुई है। उप राष्ट्रपति पद के लिए नौ सितंबर को मतदान होगा और जस्टिस रेड्डी संपर्क अभियान चला रहे हैं।
