हजारीबाग
प्राकृतिक सुंदरता से सराबोर हजारीबाग जिला सिर्फ अपनी वादियों और पहाड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि धार्मिक (कौमी) एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल के लिए भी पूरे देश में पहचाना जाता है। इसी एकता की खूबसूरत तस्वीर कटकमसांडी प्रखंड के जलमा गांव में देखने को मिलती है, जहां हिंदू परिवार की छह पीढ़ियां मुहर्रम के अवसर पर ताजिया बनाकर गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत रखे हुए हैं। 73 वर्षीय अंतू साव का परिवार पिछले छह पीढ़ियों से ताजिया तैयार कर रहा है। गांव में जब मुहर्रम का जुलूस निकलता है तो सबसे पहले अंतू साव के घर के सामने फातिहा पढ़ी जाती है।
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भाईचारे और आपसी सम्मान का संदेश
इसके बाद उनके ताजिया के पीछे-पीछे पूरे गांव के ताजिए निकलते हैं और कर्बला तक पहुंचते हैं। यह परंपरा वर्षों से प्रेम, भाईचारे और आपसी सम्मान का संदेश देती आ रही है। अंतू साव बताते हैं कि उनके पूर्वजों ने जिस परंपरा की शुरुआत की थी, उसे आज भी पूरा परिवार पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभा रहा है। उनका मानना है कि उनका गांव पूरे देश को आपसी सौहार्द और एकता का पाठ पढ़ाता है। मुहर्रम के दौरान उनका परिवार न सिर्फ ताजिया बनाता है, बल्कि मुस्लिम भाइयों के साथ ताजिया मिलान और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भी शामिल होता है।
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उनका पोता ताजिया बनाना सीख रहे हैं
इस परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी भी संभाल रही है। अंतू साव के तीन बेटे और उनका पोता ताजिया बनाना सीख रहे हैं। पोता बताता है कि पहले परदादा, फिर दादा और पिता ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया और अब वह भी दादा के साथ ताजिया बनाने में हाथ बंटाकर इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। ताजिया निर्माण में मोहम्मद शमी का भी अहम योगदान रहता है। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मिलकर इस कार्य को पूरा करते हैं, जो गांव की सामाजिक एकता को और मजबूत बनाता है। आज जब समाज में धर्म और जाति के नाम पर दूरियां बढ़ाने की कोशिशें होती हैं, ऐसे समय में जलमा गांव और अंतू साव का परिवार एक संदेश देता है कि मोहब्बत, सम्मान और भाईचारा ही भारत की असली पहचान है।