द फॉलोअप डेस्क, रांची:
झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया के लिए कोई सख्त समय-सीमा तय करने से इनकार कर दिया है। हालांकि, चीफ जस्टिस की खंडपीठ ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका को निष्पादित किया है। सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य कर्मचारी चयन आयोग ने अदालत को जानकारी दी है कि अब तक 877 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा राज्य सरकार को भेजी जा चुकी है। 292 दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया और कथित हैकिंग मामले की CID जांच की स्थिति स्पष्ट की गई है। गौरतलब है कि आयोग ने विज्ञापन संख्या 02/2025 के तहत माध्यमिक आचार्य की नियुक्ति के लिए परीक्षा ली थी।

2,819 अभ्यर्थियों की हुई थी पुनर्परीक्षा
परीक्षा में कथित अनियमितता की बात सामने आने पर आयोग ने 2,819 अभ्यर्थियों की दोबारा परीक्षा कराने का फैसला किया था। इस फैसले के खिलाफ अभ्यर्थी हाईकोर्ट गये थे। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने पुनर्परीक्षा पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया था और 8-9 मई को पुनर्परीक्षा का आयोजन हुआ। हालांकि, अभ्यर्थियों की तब भी शिकायत थी कि बगैर गलती के उन्हें दोबारा परीक्षा क्यों देनी पड़ी। 1 सितंबर को जनहित याचिका से जुड़ी सुनवाई के दौरान नियुक्ति प्रक्रिया की समय सीमा तय करने का आग्रह किया गया था।
मूल जनहित याचिका निष्पादित की गई
गौरतलब है कि जनहित याचिका के केंद्र में नियुक्ति रोकने की मांग नहीं थी। इसका मूल परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और उससे पैदा हुए विवाद से था। आयोग ने कोर्ट को बताया कि नियुक्ति प्रक्रिया जारी है और कथित अनियमितता की सीआईडी जांच चल रही है।