जामताड़ा
चेहरे पर हल्की सी मासूमियत भरी मुस्कान और अपने छोटे भाई के बालों को दुलार से संवारती 7 वर्षीय मंजू सोरेन और उसका 4 वर्षीय छोटा भाई सुशील सोरेन अब इन दोनों मासूमों की जिंदगी में दुखों का अंधेरा छटने वाला है। अब ये दोनों भाई-बहन न सिर्फ स्कूल जाएंगे, बल्कि अपने सुनहरे सपनों को भी पूरा कर सकेंगे। दरअसल, जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत कदम पारा गांव के रहने वाले इन दोनों आदिवासी अनाथ बच्चों की दर्दभरी कहानी को 'द फॉलोअप' ने 25 जून को प्रमुखता से दिखाया था। ग्राउंड रिपोर्ट के माध्यम से दोनों भाई-बहन की बेबसी और संघर्ष को समाज और सरकार के सामने लाया गया था। खबर प्रकाशित होने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस पर तुरंत संज्ञान लिया।
.jpeg)
कल्याणकारी योजनाओं से तुरंत जोड़ने का कड़ा निर्देश
सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट कर जामताड़ा के उपायुक्त (DC) को मामले की गहन जांच करने और दोनों बच्चों को शिक्षा समेत सरकार की सभी कल्याणकारी योजनाओं से तुरंत जोड़ने का कड़ा निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद जामताड़ा डीसी आलोक कुमार एक्शन मोड में आ गए। उनके आदेश पर शनिवार को जिले के आला अधिकारियों की टीम कदम पारा गांव पहुंची। प्रशासनिक टीम में जामताड़ा के अंचल अधिकारी (CO) और प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अविश्वर मुर्मू अपनी पूरी टीम के साथ सबसे पहले गांव पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चों की देखभाल कर रही उनकी बड़ी मां बेल मुनीर मुर्मू से संथाली भाषा में आत्मीयता से बातचीत की और उनकी हर समस्या को गंभीरता से सुना।

माता-पिता के असमय चले जाने के बाद दोनों बच्चे पूरी तरह बेसहारा
इस दौरान सीओ अविश्वर मुर्मू ने बताया कि गांव आकर जमीनी हकीकत देखने पर पता चला कि दोनों बच्चे पूरी तरह अनाथ हैं। सीओ ने आश्वासन दिया कि अगले एक से दो दिनों के भीतर दोनों बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और सभी जरूरी सरकारी दस्तावेज तैयार कर लिए जाएंगे। इसके साथ ही उन्हें तत्काल प्रभाव से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिया जाएगा और उनका दाखिला स्कूल में कराया जाएगा, ताकि उनकी शिक्षा बाधित न हो। इन मासूमों की कहानी बेहद मर्मस्पर्शी है। करीब एक साल पहले एक दर्दनाक हादसे में आग से झुलसने के कारण इनकी मां का निधन हो गया था। इस सदमे और बीमारी के कारण महज छह महीने बाद ही पिता ने भी दम तोड़ दिया। माता-पिता के असमय चले जाने के बाद दोनों बच्चे पूरी तरह बेसहारा हो गए।
.jpg)
आर्थिक तंगी के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में था
उनकी बुजुर्ग बड़ी मां बेल मुनी मुर्मू किसी तरह ईंट भट्ठे में मजदूरी कर इन दोनों का भरण-पोषण कर रही थीं, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण बच्चों का भविष्य अंधकार में था। प्रशासनिक टीम के इस त्वरित एक्शन के दौरान पंचायत की मुखिया सरोज सोरेन, समाजसेवी महावीर राय, बाल संरक्षण इकाई जामताड़ा के क्षेत्रीय कार्यकर्ता हलधर महतो और बाल कल्याण समिति (CWC) के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। प्रशासन की इस संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई से पूरे गांव में खुशी की लहर है। परिजनों और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जिला प्रशासन और विशेष रूप से 'द फॉलोअप' को दिल से धन्यवाद दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह खबर सामने नहीं आती, तो इन बच्चों की जिंदगी बर्बाद हो जाती, लेकिन आज लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और सरकार के समन्वय से दोनों बच्चों का भविष्य उज्जवल होने जा रहा है। प्रशासनिक नियमों के तहत बच्चों के कल्याण के लिए आवश्यक सरकारी पहचान पत्रों की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।