द फॉलोअप डेस्क, रांची:
17 अगस्त 2025 का दिन झारखंड के लिए ऐतिहासिक रहा। रांची में 26 दिन तक चले छात्र आंदोलन को जीत मिली। पूरे प्रकरण में हेमंत सोरेन सरकार का संवेदनशील चेहरा भी दिखा। प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक बड़े छात्र आंदोलन पर सकारात्मक पहल करते हुए सरकार ने ऐसी तमाम भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया, जिनमें गड़बड़ी की आशंका है। छात्र आंदोलन पर संवेदनशील रवैया दिखाते हुए सीएम हेमंत ने, ना केवल उन भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया जिनपर सवाल था, बल्कि भर्ती परीक्षा आयोजित कराने वाली 2 बड़ी संस्थाओं, JPSC और JSSC में आमूल-चूल सुधार के लिए भी ठोस पहल की।
मुख्यमंत्री ने गड़बड़ियों की जांच कराने के लिए सेवानिवृत्त जज की अगुवाई में जांच कमिटी बनाने का वादा किया है, और साथ ही IAS अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का ऐलान किया है, जो JPSC और JSSC में व्यापक सुधार के लिए अपने सुझाव देगी।
आयोगों में सुधार के प्रति सीएम की गंभीरता का आलम ऐसा है कि उन्होंने एक पोर्टल बनाने का फैसला किया है, जहां अभ्यर्थी और उनके अभिभावक भी अपने सुझाव और शिकायतें भेज सकते हैं।

छात्र आंदोलन से झारखंड में बदलाव की शुरुआत
सरकार ने कहा कि छात्र आंदोलन ने एक बड़े बदलाव की शुरुआत की है और झारखंड इस बदलाव का मॉडल बनेगा। पिछले 26 दिनों में झारखंड ने देश को लोकतंत्र की बहुत खूबसूरत तस्वीर दिखाई। एक ओर जहां सिस्टम से नाराज छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में शांतिपूर्ण और रचनात्मक आंदोलन किया और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान करते हुए अपने हक-अधिकार की लड़ाई लड़ी तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी पूरे आंदोलन के दौरान सयंमित होकर शिकायतों, मांगों और समस्याओं की व्यक्तिगत तौर पर मॉनिटरिंग करते हुए सुधार की संभावनाओं पर विचार करते रहे।
इस छात्र आंदोलन का सबसे सुखद पहलु ये रहा कि हेमंत सरकार ने कभी इसकी अनदेखी नहीं की। आंदोलन की शुरुआत में पहले तो एसडीओ और ADM को छात्रों से वार्ता करने के लिए भेजा तो वहीं 4 मंत्रियों की एक कमिटी भी बनाई, जिसने छात्र डेलिगेशन से वार्ता की। दूसरे दौर की बातचीत के बाद ही सीएम हेमंत ने 14वीं JPSC पीटी परीक्षा को रद्द करने का फैसला कर लिया था।
सीएम ने कई दफा सार्वजनिक मंच से कहा कि वह युवाओं के मुद्दे पर बेहद संवेदनशील हैं और पूरी गंभीरता से इसका निराकरण करना चाहते हैं।

सोमवार को कैबिनेट की बैठक में लिया अहम फैसला
बीते सोमवार को सीएम ने कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई। करीब 4 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ऐलान किया कि JSSC-CGL समेत TDPL द्वारा आयोजित कराई गई सभी भर्ती परीक्षाओं को रद्द किया जाता है। गौरतलब है कि यही आंदोलनरत छात्रों की सबसे अहम मांग थी, और इसे मान लिया जाना यह बताता है कि सरकार उनकी शिकायतों को लेकर कितनी संवेदनशील थी।
सीएम हेमंत के फैसले पर आंदोलनकारी में खुशी
16 दिन तक अनशन करने वाले छात्रों ने कहा कि सरकार ने यह साबित किया है कि वह आदिवासियों और मूलवासियों के हितों का खयाल रखती है। उन्होंने सीएम का आभार जताते हुए कहा कि मुश्किल CGL भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने का भरोसा देना निश्चित रूप से बड़ा फैसला है। इस मामले में गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी ने CID की जांच में कई चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसने कई भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी की बात स्वीकार की है, और यही वजह है कि मुख्यमंत्री ने केवल भर्ती परीक्षाओं को रद्द ही नहीं किया, बल्कि ऐलान किया है कि 2014 से ली गई सभी भर्ती परीक्षाओं की जांच होगी, ताकि तमाम छोटी-बड़ी गड़बड़ियों का पता लगाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।
एक ओर जहां सीएम ने JSSC-CGL समेत करीब 15 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया है तो वहीं रांची में आंदोलनरत छात्रों ने इसे अपनी संघर्ष से मिली जीत का पहला चरण बताया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक गड़बड़ियों की CBI जांच की घोषणा नहीं होती है, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
आंदोलन शुरू होने से पहले CID जांच की शुरुआत हुई
गौरतलब है कि 14वीं JPSC पीटी परीक्षा का परिणाम जारी किए जाने के बाद जैसे ही संदिग्ध रूप से सफल घोषित किए गये अभ्यर्थियों की OMR शीट वायरल होने लगी, छात्र आंदोलन की शुरुआत से पहले ही सरकार की पहल पर मामले की CID जांच शुरू हो गई थी। 21-22 जुलाई की दरमियानी रात से ही गिरफ्तारियों का सिलसिला शुरू हो गया था। कहा जाता है कि मामले में जवाबदेही तय करते हुए सीएम ने JPSC के चेयरमैन एल ख्यांगते का इस्तीफा मांग लिया था। इस केस में संदिग्ध परीक्षा माफिया अभय कुमारी तिवारी, JPSC की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, परीक्षा एजेंसी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह और आयोग के पूर्व चेयरमैन एल ख्यांगते समेत 20 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता से भी पूछताछ जारी है। अभय तिवारी से जुड़े करीबी रिश्तेदारों को भी हिरासत में लिया गया है। जांच के दौरान सामने आई फाइंडिंग के आधार पर ही मुख्यमंत्री ने TDPL द्वारा आयोजित कराई गई परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला किया।
CID की जांच को हेमंत सरकार कितनी गंभीरता से ले रही है। सरकार ने कहा कि SIT की जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच प्रभावित ना हो, इसलिए अभी फाइंडिंग्स को सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। हां, लेकिन इतना तय है कि दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली व्यक्ति क्यों ना हो, बख्शा नहीं जायेगा।
आंदोलनकारी छात्रों की जीत का श्रेय सरकार को भी
यह निश्चित रूप से आंदोलनरत छात्रों की बड़ी जीत है और साथ ही इसका श्रेय सरकार को भी जाता है कि उन्होंने आंदोलन का दमन करने की जगह अपनी जवाबदेही तय की और कठोर निर्णय लिया। सीएम हेमंत ने अपने फैसले से युवाओं में यह भरोसा पैदा किया है कि अब उनकी आवाज सुनी जाएगी। वे हक-अधिकार की लड़ाई इस उम्मीद के साथ लड़ सकते हैं कि सत्ता उनकी बात सुनेगी।