द फॉलोअप डेस्क
गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे HEC को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में गतिविधियां तेज हो रही हैं। संसद की औद्योगिक स्थायी समिति की छह सदस्यीय टीम तीन दिवसीय दौरे पर 19 अगस्त को रांची पहुंचेगी। समिति का यह दौरा एचईसी की मौजूदा स्थिति को करीब से समझने और कंपनी की समस्याओं का प्रत्यक्ष आकलन करने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। सांसद तिरुचि शिवा के नेतृत्व में आने वाली समिति में सांसद हंसमुख भाई पटेल समेत अन्य सांसद शामिल हैं। रांची पहुंचने के बाद समिति के सदस्य एचईसी के अधिकारियों और प्रबंधन के साथ कंपनी से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जानकारी हासिल करेंगे। इसके बाद 20 अगस्त को समिति एचईसी के तीनों प्रमुख प्लांटों का स्थलीय निरीक्षण करेगी। इस दौरान उत्पादन इकाइयों, मशीनरी, कार्यप्रणाली और मौजूदा संसाधनों की स्थिति का जायजा लिया जाएगा।

तीनों प्लांटों की मौजूदा स्थिति का होगा आकलन
निरीक्षण के दौरान एचईसी के सीएमडी केएस मूर्ति के साथ कंपनी के सभी निदेशक भी मौजूद रहेंगे। प्रबंधन की ओर से समिति के सदस्यों को तीनों प्लांटों की वर्तमान स्थिति, उत्पादन क्षमता, मशीनों के संचालन और कंपनी के सामने मौजूद चुनौतियों की जानकारी दी जाएगी। समिति यह भी समझने का प्रयास करेगी कि मौजूदा संसाधनों का किस तरह उपयोग किया जा रहा है और उत्पादन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किन कदमों की जरूरत है। समिति के दौरे का एक अहम हिस्सा श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत भी होगी। प्लांटों का निरीक्षण करने के बाद समिति श्रमिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेगी। इस दौरान कर्मचारियों की समस्याओं, कंपनी की मौजूदा स्थिति और एचईसी को लेकर उनकी अपेक्षाओं पर चर्चा होने की संभावना है। लंबे समय से आर्थिक संकट का सामना कर रहे एचईसी के कर्मचारियों के लिए समिति का यह दौरा काफी अहम माना जा रहा है। इसके अलावा 20 अगस्त को समिति की झारखंड सरकार की कैबिनेट सचिव वंदना दादेल के साथ भी बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में एचईसी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। राज्य सरकार के स्तर से कंपनी को लेकर किए जा रहे प्रयासों और केंद्र के स्तर पर संभावित सहयोग को लेकर भी विचार-विमर्श हो सकता है।

HEC के भविष्य और पुनरुद्धार पर रहेगी नजर
एचईसी देश के महत्वपूर्ण सार्वजनिक क्षेत्र के इंजीनियरिंग प्रतिष्ठानों में रहा है और भारी इंजीनियरिंग उपकरणों के निर्माण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में कंपनी की मौजूदा स्थिति को लेकर केंद्र और राज्य स्तर पर लगातार चिंता जताई जाती रही है। संसदीय समिति के प्रत्यक्ष निरीक्षण और संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट से एचईसी के भविष्य और उसके पुनरुद्धार को लेकर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।