खूंटी
खूंटी के डुगंरा बगीचा में आज आदिवासी समुदाय की एक अहम सभा में फैसला लिया गया कि गांवों के सभी प्रस्तावों की स्वीकृति अब ग्रामसभा देगी। साथ ही कहा गया कि गांवों में अब चंगाई सभा नहीं होगी और धर्मांतरित आदिवासी पारंपरिक पदों पर नहीं रह पाएंगे। इस सभा में 12 ग्रामसभा के ग्राम प्रधान, मुंडा, पाहन, पाइनभरा, सहायक सचिव और महिला स्दस्य शामिल हुए। सभा में पेसा क्षेत्रों में ग्रामसभा की पारंपरिक व्यवस्था और उसकी शक्तियों को लेकर चर्चा हुई। आदिवासी नेताओं ने कहा कि पेसा कानून जहां ग्रामसभा को केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र के रूप में मान्यता देता है। वहीं यह आदिवासियों को जल, जंगल और जमीन पर पारंपरिक अधिकार भी सुनिश्चित करता है।

धर्मांतरित आदिवासियों की भूमिका पर चर्चा
वक्ताओं ने कहा, इसी के साथ एक संवेदनशील मुद्दा सामने आता है। वह है, ग्रामसभा और पड़हा के पारंपरिक पदों पर धर्मांतरित आदिवासियों की भूमिका। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार, इन पदों से जुड़ी जिम्मेदारियां केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक भी हैं। ऐसे में यह तर्क दिया जा रहा है कि धर्मांतरित व्यक्ति इन धार्मिक कर्तव्यों को पूर्ण रूप से निभाने में सक्षम नहीं होते। ऐसे में ग्रामसभा में एक प्रस्ताव पारित कर घर्मांतरित आदिवासी जो ग्रामप्रधान, पाहन या अन्य कोई पद पर हैं उन्हें हटाया जाएगा।
