द फॉलोअप डेस्क
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जुड़ी महिलाओ की विशाल तादाद महिला सशक्तिकरण का सबसे उत्कृष्ट मॉडल है। इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकार की उदासीनता उनकी कथनी और करनी की असमानता को दर्शाता है। पिछली गैर भाजपा सरकार के समय में ही वर्ष 2014 में अनुबंध पर कार्यरत पर स्वास्थ्य कर्मचारियों की सेवा नियमित हुई थी। इस बार भी स्थाई पदों पर स्थाई नियुक्ति करने के लिए सरकार को बाध्य होना पड़ेगा। यह बातें सोमवार को भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने आज राजभवन के समीप झारखंड जनस्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले अनशनकारी स्वास्थ्य कर्मचारियों से मिलकर कही। उन्होंने अनशनकारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भाकपा माले आपके आंदोलन का समर्थन करती है। हम आपके आंदोलन के साथ खड़े हैं।

बजट सत्र में जोरदार तरीके से उठेगी आवाज
विधायक विनोद सिंह ने कहा कि बजट सत्र में नियुक्तियों को स्थायी करने के लिए जोरदार तरीके से आवाज उठेगी। सरकार को आपके पक्ष में फैसला करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। काम कर रही स्वास्थ्य कर्मियों के लिए 20 प्रतिशत ग्रेस देने की घोषणा से बात नहीं बनेगी। राज्य सरकार आंदोलनरत स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ अविलंब समझौता वार्ता कर इनकी सेवा स्थाई करने की दिशा में ठोस पहल करें। उनके साथ माले राज्य कमेटी सदस्य भुवनेश्वर केवट, नगर सचिव नंदिता भट्टाचार्य और झारखंड आंदोलनकारी पुष्कर महतो समेत कई लोग शामिल थे।
