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गिरिडीह सदर अस्पताल में बिजली गुल, मोबाइल फ्लैशलाइट में हुआ मरीजों का इलाज

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द फॉलोअप डेस्क
गिरिडीह जिले के सदर अस्पताल में शनिवार देर रात अचानक बिजली गुल हो जाने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए। रात करीब 11:30 बजे बिजली आपूर्ति ठप होते ही अस्पताल परिसर अंधेरे में डूब गया और इलाज की व्यवस्था लड़खड़ा गई। करीब आधे घंटे तक अस्पताल में बिजली नहीं रहने से डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान इमरजेंसी वार्ड समेत कई विभागों में अंधेरा पसरा रहा। रात करीब 12 बजे बिजली विभाग के कर्मियों ने जनरेटर चालू किया, तब जाकर स्थिति कुछ सामान्य हो सकी। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्षी दलों और स्थानीय लोगों ने इस मामले को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी को भी घेरा है और कहा है कि जब जिला मुख्यालय के अस्पताल की यह स्थिति है, तो ग्रामीण इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


मोबाइल की फ्लैशलाइट में हुआ मरीजों का इलाज
बिजली गुल होने के कारण चिकित्सकों को मोबाइल फोन की फ्लैशलाइट की रोशनी में मरीजों की जांच करनी पड़ी। मरीजों के परिजनों ने भी अपने मोबाइल की रोशनी जलाकर डॉक्टरों की मदद की, तब जाकर मरीजों की रिपोर्ट देखी जा सकी और इलाज संभव हो पाया। यह दृश्य अस्पताल की आपातकालीन तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। शनिवार की घटना के बाद रविवार शाम को भी अस्पताल की बिजली व्यवस्था एक बार फिर ठप हो गई। इसी दौरान मुफस्सिल थाना क्षेत्र के तिगोंजोरी निवासी नीलमुनि देवी, अजय हेम्ब्रम, अनुष्का हेम्ब्रम, विजय किस्कु और पवन किस्कु बाइक और ऑटो की टक्कर में घायल होकर अस्पताल पहुंचे। लेकिन अस्पताल में अंधेरा होने के कारण डॉक्टरों को उनका इलाज

मोबाइल की फ्लैशलाइट के सहारे करना पड़ा
घायल के परिजन काली सोरेन ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर चारों ओर अंधेरा पसरा हुआ था और ड्रेसिंग रूम तक में रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं थी। एक घायल का सिर फटा हुआ था, जिसे मोबाइल की रोशनी में ही टांका लगाया गया।