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सावन की तीसरी सोमवारी पर गिरिडीह के हरिहरधाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़

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गिरिडीह
सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के पावन संयोग पर गिरिडीह जिले के बगोदर स्थित प्रसिद्ध हरिहरधाम मंदिर में सोमवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में देखने को मिलीं। हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा हरिहरधाम भक्तिमय नजर आया। नाग पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के साथ नाग देवता की भी विधिवत पूजा-अर्चना की। भक्तों ने जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, आरोग्यता और मंगल की कामना की। सावन की सोमवारी और नाग पंचमी के एक साथ पड़ने के कारण मंदिर में सामान्य दिनों की तुलना में श्रद्धालुओं की भीड़ काफी अधिक रही।
65 फीट ऊंचा शिवलिंगाकार मंदिर बना आकर्षण का केंद्र
बगोदर-हजारीबाग मुख्य मार्ग पर स्थित हरिहरधाम अपनी अनोखी स्थापत्य शैली के लिए प्रसिद्ध है। करीब 65 फीट ऊंचे शिवलिंगाकार मंदिर की भव्य संरचना दूर से ही श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। मंदिर का बाहरी स्वरूप शिवलिंग के आकार में है, जबकि गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है, जहां भक्त विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। मंदिर परिसर में भगवान शिव के वाहन नंदी महाराज भी विराजमान हैं। श्रद्धालु नंदी के दर्शन के बाद बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। नाग पंचमी के कारण सोमवार को शिव पूजा के साथ नाग देवता की पूजा का भी विशेष महत्व देखने को मिला।
कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
हरिहरधाम सावन के महीने में झारखंड ही नहीं, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल समेत आसपास के कई राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आस्था का केंद्र बन जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी धार्मिक आस्था के कारण सावन के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है। सोमवार को भी सुबह से ही दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं का मंदिर परिसर में पहुंचना जारी रहा। कई भक्त परिवार के साथ मंदिर पहुंचे, जबकि बड़ी संख्या में कांवड़िया भी बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचे।
भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्था
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रबंधन और प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने और पूजा-अर्चना के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक इंतजाम किए गए। दिनभर मंदिर परिसर में पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का दौर चलता रहा।
1988 में हुई थी प्राण-प्रतिष्ठा
हरिहरधाम के इतिहास को लेकर स्थानीय स्तर पर कई मान्यताएं प्रचलित हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक समय यह इलाका वीरान था और झाड़ियों तथा श्मशान क्षेत्र से घिरा होने के कारण लोग यहां आने से भी कतराते थे। पश्चिम बंगाल के अमरनाथ मुखोपाध्याय ने यहां भव्य शिवलिंगाकार मंदिर निर्माण का संकल्प लिया। इसके बाद वर्ष 1988 में मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। मंदिर निर्माण के बाद धीरे-धीरे यह स्थान पूरे क्षेत्र की धार्मिक पहचान बन गया। वर्तमान में हरिहरधाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि विवाह संस्कारों के लिए भी प्रसिद्ध है। वर्षभर यहां श्रद्धालुओं और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी रहता है।
सावन और नाग पंचमी पर दिखी अटूट आस्था
सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के अवसर पर हरिहरधाम में उमड़ी भीड़ ने एक बार फिर भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को प्रदर्शित किया। सुबह से लेकर दिनभर मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से गूंजता रहा। हरिहरधाम की भव्य शिवलिंगाकार संरचना, धार्मिक मान्यताएं और ऐतिहासिक पहचान इसे झारखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में अलग स्थान देती हैं। सावन के पवित्र महीने में यहां उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ धार्मिक पर्यटन और क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा की तस्वीर भी पेश करती है।

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