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साधारण कार्यकर्ता से कैबिनेट मंत्री तक का सफर, जानें कैसा था रामदास सोरेन का राजनीतिक जीवन

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन का बीती रात 15 अगस्त को निधन हो गया। उनका इलाज दिल्ली के अपोलो अस्पताल में चल रहा था। जिसके बाद झारखंड की राजनीती में शोक की लहर फ़ैल गई। दरअसल 2 अगस्त को वह बाथरूम में गिर गए थे और जिसके बाद दिल्ली में इलाज चल रहा था और इस दौरान वे वेंटिलेटर पर थे। रामदास सोरेन के निधन की खबर झारखंड के लिए दोहरा दुख लेकर आई है। इससे पहले, 4 अगस्त को दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन हुआ था। ऐसे में एक महीने के भीतर राज्य ने दो बड़े आदिवासी नेताओं को खो दिया है, जो झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है। 
राजनीतिक सफ़र
रामदास सोरेन का राजनीतिक सफर इतना आसान नहीं था। एक साधारण कार्यकर्ता से शुरू होकर कैबिनेट मंत्री तक का सफ़र काफी मुश्किल भरा था। उनका जीवन झारखंड के आंदोलन और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए समर्पित रहा। भले ही आज वे राजनीति के जाने माने चेहरा बन चुके थे। लेकिन आपको बता दें कि जब उन्होंने अपने राजनीतिक सफ़र की शुरुआत की थी, तब वह पहला चुनाव हार गए थे। और वह साल था 2005 का जब उन्हें किसी पार्टी ने टिकट नहीं दिया था। जिसके बाद उन्होंने घाटशिला से निर्दलीय चुनाव लड़ने का मन बना लिया। लेकिन जब परिणाम आया तो उन्हें मालूम हुआ कि वे चुनाव हार गए हैं। उसके बाद उन्होंने JMM की पार्टी ज्वाइन कर ली। साल बीते और मंत्री रामदास सोरेन की किस्मत चमकी, जब उन्हें JMM ने 2009 के विधानसभा चुनाव में भरोसा जताकर टिकट दिया। और परिणाम उनके पक्ष में आया। वे पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने उस समय के जाने माने कांग्रेस नेता और तीन बार विधायक रह चुके प्रदीप कुमार बलमुचू को हराया था।
समय ने ली दोबारा करवट 
2009 का चुनाव जितने के बाद JMM ने 2014 के चुनाव में दोबारा भरोसा जताया, और उन्हें टिकट दिया। लेकिन जब परिणाम आये तो रामदास सोरेन चुनाव हार चुके थे। फिर समय ने करवट ली और उसके बाद 2019 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की और विधानसभा पहुँचने में सफल रहे। 
झारखंड की राजीनीति में मच गई थी हलचल 
उसके बाद 2024 के चुनाव में फिर से विधायक बने और कैबिनेट में जगह बनाकर शिक्षा मंत्री का पद संभाला। लेकिन इसके पूर्व ही झारखंड की राजनीती में कुछ ऐसा हुआ कि पुरे झारखंड में हलचल मच गई। इसी दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को जेल हो गई। और फिर इस पद को चंपाई सोरेन ने भरा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जब जेल से बाहर आये तो वे फिर से सीएम बने। जो शायद चंपाई सोरेन को नहीं भाया और उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर लिया। उसके बाद कोल्हान क्षेत्र से एक बड़े कद्दावर नेता की जगह खाली हो गई। जिसके बाद JMM ने रामदास सोरेन को वहां से जगह दी। लेकिन रामदास सोरेन के अचानक चले जाने से वह जगह फिर खाली हो चुकी है। अब देखना ये है कि इनके निधन के बाद वहां से किस नेता की किस्मत चमकती है। 
 

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