द फॉलोअप डेस्क
प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीएलएफआई के पूर्व नक्सली संजय भगत की हत्या उसके ही चचेरे भाई और बहन ने मिलकर करवाई। जमीन विवाद को लेकर दोनों ने 3 लाख रुपये की सुपारी देकर संजय की हत्या करवा दी। लोहरदगा पुलिस ने हत्या में शामिल सभी 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
7 जुलाई को सदर थाना क्षेत्र के अरकोसा गांव स्थित एक पत्थर खदान में बने तालाब से संजय भगत का शव बरामद हुआ था। हत्या की जानकारी मिलते ही लोहरदगा एसपी सादिक अनवर रिजवी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसआईटी टीम का गठन किया। शव मिलने के 24 घंटे के भीतर ही पूरे हत्याकांड का खुलासा कर दिया गया।
पुलिस जांच में पता चला कि हत्या की साजिश संजय भगत के चचेरे भाई बृजमोहन भगत और चचेरी बहन जयंती भगत ने मिलकर रची थी। बृजमोहन ने अपने दोस्त अमर उरांव के जरिए पेशेवर अपराधियों से संपर्क किया और 3 लाख रुपये में हत्या की सुपारी दी। एडवांस रकम मिलने के बाद आरोपियों ने लाठी और पत्थर से वार कर संजय की हत्या कर दी। हत्या के बाद शव को पत्थरों से बांधकर बंद खदान के तालाब में फेंक दिया गया ताकि साक्ष्य छिपाया जा सके।
गिरफ्तार किए गए आरोपी
1. बृजमोहन भगत (चचेरा भाई)
2. जयंती भगत (चचेरी बहन)
3. अमर उरांव
4. राजू महली
5. एकलव्य उरांव
6. कुशल उरांव
पुलिस ने आरोपियों के पास से एक देशी पिस्तौल, एक मैगजीन, 22 बोर की चार जिंदा गोली, एक देशी कट्टा, 315 बोर की गोली और 93,500 रुपये नकद (सुपारी की रकम) बरामद की है। लोहरदगा एसपी सादिक अनवर रिजवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि यह हत्या पूरी तरह से पूर्व नियोजित थी, जिसे जमीन विवाद के चलते अंजाम दिया गया। सभी अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है।
