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दोहरे हत्याकांड में फरार JDU के पूर्व विधायक रामबालक सिंह छपरा जंक्शन से गिरफ्तार

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द फॉलोअप डेस्क
समस्तीपुर के चर्चित दोहरे हत्याकांड में फरार चल रहे जदयू के पूर्व विधायक रामबालक सिंह को छपरा रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया है। उन पर समस्तीपुर में पूर्व मुखिया और उसके साथी की हत्या का आरोप है। पूर्व विधायक को GRP ने स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक नेपाल भागने की फिराक में थे। मगर उसे जीआरपी ने छपरा जंक्शन से गिरफ्तार कर लिया। बताते चलें कि 20 फरवरी को विभूतिपुर थाना क्षेत्र के मडडिहा ब्रह्मस्थान के पास पूर्व मुखिया और उनके सहयोगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने विशेष टीम गठन कर 3 मार्च को जदयू के पूर्व विधायक रामबालक सिंह के भाई लालबाबू सिंह को दिल्ली एनसीआर के गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया था। पूर्व विधायक को भी गिरफ्तार करने के लिए लगातार छापेमारी चल रही थी। इस दौरान गुरुवार को मोबाइल लोकेशन के आधार पर सारण पुलिस और समस्तीपुर पुलिस के सहयोग से पूर्व विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया

अश्लील वीडियो के कारण हुई थी हत्या
पूर्व विधायक के भाई को गिरफ्तार करने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने 4 मार्च को डबल मर्डर मामले का खुलासा किया था। तब उन्होंने कहा था कि मर्डर के पीछे का मुख्य कारण पूर्व विधायक का एक लड़की के साथ अश्लील वीडियो बना। जिसे पूर्व मुखिया सुरेंद्र प्रसाद इलाके में लोगों के बीच दिखाया करता था। दरअसल विभूतिपुर के सिंघिया बुजुर्ग दक्षिण पंचायत में उपचुनाव होना था, जिसको लेकर सुरेंद्र प्रसाद पूर्व विधायक के खिलाफ उसके अश्लील वीडियो का इस्तेमाल कर रहा था। इसके वायरल होने से पूर्व विधायक की छवि खराब हो रही थी। इसे ही हत्या का मुख्य कारण बताया जा रहा था।

शूटर किया गया था हायर
पुलिस की जांच के अनुसार वीडियो वायरल होने के बाद पूर्व विधायक के भाई ने शूटर को हायर कर इस वारदात को अंजाम दिया। इस घटना को अंजाम देने में चार शूटर शामिल थे। उन्हें मोटी रकम देकर दूसरी जगह से बुलाया गया था। इधर, जांच के क्रम में पुलिस को यह भी पता चला कि मृतक पूर्व मुखिया सुरेंद्र प्रसाद सिंह अवैध शराब का कारोबार भी करते थे। मालूम हो कि समस्तीपुर जिला के विभूतिपुर थाना क्षेत्र में  सिंघिया बुजुर्ग दक्षिण पंचायत के पूर्व मुखिया सुरेंद्र प्रसाद सिंह और उनके सहयोगी सत्यनारायण महतो को गोली मारी गई थी। इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई थी।

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