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चार श्रमिक कानून, मनरेगा बदलाव और रेल लाइन विवाद पर मेहरमा में उग्र प्रदर्शन, मुख्य मार्ग घंटों जाम

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गोड्डा 
गोड्डा जिले के मेहरमा में चार श्रमिक कानूनों के विरोध, मनरेगा का नाम बदले जाने के फैसले और गोड्डा–पीरपैंती नई बीजी रेल लाइन को पुराने सीमांकन के अनुसार मेहरमा अंचल से निर्माण कराने की मांग को लेकर बृहस्पतिवार को जोरदार आंदोलन हुआ।
झारखंड राज्य किसान महासभा के बैनर तले सैकड़ों किसान और मजदूर सिद्धू-कान्हू चौक पर जुटे और गोड्डा–पीरपैंती मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। आंदोलन का नेतृत्व किसान महासभा के नेता अशोक साह ने किया। प्रदर्शनकारियों ने “मजदूर विरोधी कानून वापस लो”, “मनरेगा से छेड़छाड़ बंद करो” और “पुराने सीमांकन पर ही रेल लाइन निर्माण करो” जैसे नारे लगाए।


सभा को संबोधित करते हुए अशोक साह ने कहा कि चारों श्रमिक कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाले हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए मजदूरों के हक में कटौती कर रही है। उन्होंने मनरेगा को ग्रामीण गरीबों की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि इसके नाम और स्वरूप में बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रेल लाइन के मुद्दे पर भी प्रदर्शनकारियों ने कड़ा रुख अपनाया। उनका कहना है कि गोड्डा–पीरपैंती रेल लाइन का निर्माण पुराने सीमांकन के आधार पर मेहरमा अंचल से ही होना चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार और विकास का लाभ मिल सके। सीमांकन में बदलाव को उन्होंने क्षेत्र के साथ अन्याय बताया।


सड़क जाम के कारण मुख्य मार्ग पर कई घंटों तक आवागमन बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलने पर प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया।
किसान महासभा ने चेतावनी दी कि यदि चार श्रमिक कानून वापस नहीं लिए गए, मनरेगा में बदलाव रोका नहीं गया और रेल लाइन निर्माण उनकी मांग के अनुरूप नहीं हुआ, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। मेहरमा का यह प्रदर्शन साफ संकेत है कि किसान और मजदूर अपने मुद्दों पर सड़क पर उतरने को तैयार हैं।

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