जीतेंद्र कुमार
सचिवालय के किसी फाइल का मुख्य जन्मदाता प्रशाखा पदाधिकारी को माना जाता है। किसी नये नियम-कानून के जन्म की शुरुआत या किसी को दंड या उपहार देने की लिखित प्रक्रिया भी यहीं से शुरू होती है। टिप्पणियों के माध्यम से किसी विषय को बनाओ और बिगाड़ो का खेल भी यहीं से प्रारंभ होता है। एक ही नियम की दोहरी व्याख्या का जन्म भी यहीं से माना जाता है। सचिवालयी अनुदेश में इस पद के महत्व को रेखांकित भी किया गया है। इससे यह स्पष्ट है कि सचिवालयी व्यवस्था में ऊपर सचिव के बाद नीचे सबसे महत्वपूर्ण प्रशाखा पदाधिकारी का ही पद है। अब झारखंड के सचिवालयों में 12 वर्ष से अधिक समय से जमे 221 प्रशाखा पदाधिकारियों का जुलाई में स्थानांतरण कर दिया गया। पहले इन्हें 18 अगस्त तक विरमित होने का समय दिया गया। लेकिन 22 अगस्त से 28 अगस्त तक झारखंड विधानसभा के पूरक मानसून सत्र के कारण समेकित रूप से सभी प्रशाखा पदाधिकारियों के विरमितीकरण का काम पूरा नहीं हो सका।

जैसे ही 28 अगस्त को विधानसभा के पूरक मानसून सत्र को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया, शीर्ष पर बैठे साहब ने 29 अगस्त को एक सितंबर से सभी 221 प्रशाखा पदाधिकारियों के लिए स्वतः विरमित करने का आदेश जारी कर दिया है। आदेश में कहा है कि स्थानांतरित प्रशाखा पदाधिकारी अगस्त माह का वेतन पुराने विभाग से ले सकते हैं। फरमान के जारी होते ही सचिवालय में यह खबर आग की तरह फैल हुई। उसके बाद से आदेश के गुण-दोषों पर चर्चा और बहस की शुरुआत जारी है। विभागीय कार्यों से अधिक इसी स्थानांतरण पर बहस और चर्चा है। सचिवालय के कलाकार इस चर्चा के केंद्र में हैं।
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सवाल खड़ा किया जाने लगा है कि क्या इस बार भी दुलरुए विरमित हो जाएंगे। सचिवालय के प्रशाखा पदाधिकारियों में दुलरुओं को सभी जानते हैं। नाम भी गिनाते हैं। दुलार के कारण भी बताते हैं। बताते हैं कि किस तरह एक बार तत्कालीन विकास आयुक्त ने वित्त विभाग के एक दुलरुए को विरमित करने के लिए कार्मिक सचिव और मुख्य सचिव तक डीओ लेटर लिख दिया था। उसे आकाश में भेजने पर अड़ गए थे। बावजूद 2013 से विभाग में जमे दोनो दुलरुए विरमित नहीं हुए। इस बार भी विभाग के एक बड़े पदाधिकारी ने कार्मिक सचिव और एक अन्य बड़े पदाधिकारी को डीओ लेटर लिख कर स्थानांतरण पर रोक लगाने का आग्रह किया है। इस तरह के दुलरुए कई और भी हैं।

अब इन खिलाड़ियों के खेल और उनकी गुगली पर तो सबकी नजर है ही, सोमवार का बेसब्री से इंतजार भी है। इस कारण सोमवार का दिन सचिवालय के लिए एक अहम दिन के रूप में देखा जा रहा है। उनके सहकर्मी प्रतीक्षा कर रहे हैं कि ऐसे दुलरुए सोमवार को कहां जाते हैं। वर्तमान विभाग में आते हैं तो क्या फाइल डील करते हैं या फिर स्थानांतरित विभाग में मन मार कर जाने को विवश होते हैं। यह भी तौला जानेवाला है कि इस बार कितने खिलाड़ी सब पर भारी। किसकी गुगली को बैट्समैन ने छक्का मार दिया। पर इस बार यह सभी मान रहे हैं कि कार्मिक वाले बड़े साहब के रुख और अकड़ के कारण, अधिकतर खिलाड़ियों को इस बार बोल्ड ही होना पड़ेगा। क्योंकि इस बार बड़े बड़े साहब, नेताजी भी उस साहब को समझाने कुछ कहने की बात तो दूर, उन्हें फोन तक करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
