गोड्डा
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर बृहस्पतिवार को झारक्राफ्ट द्वारा गोड्डा जिला के विश्वविख्यात रेशम नगरी भगैया में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। हथकरघा दिवस के इस आयोजन में ठाकुरगंगटी प्रखंड के दर्जनों बुनकरों ने भाग लिया और स्थानीय स्तर पर तैयार की जाने वाली भगैया सिल्क, मधुबनी पेंटिंग साड़ियाँ और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। हालांकि, जहां एक ओर यह कार्यक्रम सांस्कृतिक रूप से समर्पण और परंपरा का प्रतीक बना, वहीं दूसरी ओर स्थानीय बुनकरों ने विभाग पर अनदेखी की शिकायत की।
बुनकरों का आरोप है कि भगैया में कुछ चुनिंदा लोगों को ही प्राथमिकता मिलती है। "जिनकी पहुंच है, वे 10-12 समूह चलाकर मालामाल हो रहे हैं। बाकी आम बुनकरों को न तो काम मिल रहा है और न ही मजदूरी का उचित मूल्य," एक स्थानीय बुनकर ने बताया। उनका कहना है कि कई ऐसे लोग हैं जो स्वयं बुनकर नहीं हैं, लेकिन बुनकर कार्ड बनवाकर सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।

एक अन्य बुनकर ने बताया कि "यहां स्थानीय स्तर पर कोई मार्केटिंग सुविधा नहीं है, जिससे हम अपने उत्पाद बेच सकें। मजबूरी में हमें बिहार के भागलपुर जाकर कम रेट में अपना कपड़ा बेचना पड़ता है।"
कार्यक्रम के दौरान बुनकरों ने यह भी कहा कि राज्य स्तर से अधिकारी तो आते हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता। "सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है," उन्होंने जोड़ा।
बुनकरों की मांग है कि पारदर्शिता के साथ कार्य करना चाहिए और सभी बुनकरों को समान अवसर मिलना चाहिए। साथ ही भगैया में स्थायी विपणन केंद्र और उचित मजदूरी सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।

भगैया सिल्क सिटी झारखंड ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी पारंपरिक रेशम और हस्तशिल्प कलाओं के लिए प्रसिद्ध है। यहां के बुनकर दशकों से इस विरासत को जीवित रखे हुए हैं। लेकिन संसाधनों की कमी, बाजार की उपलब्धता न होना और संगठनात्मक अनदेखी जैसे मुद्दों के चलते इनकी स्थिति लगातार संकटग्रस्त बनी हुई है।
