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नज़रबंद चंपाई और सूर्या हांसदा एनकाउंटर : बाबूलाल मरांडी का सरकार पर दोहरा वार, आदिवासी हितों की अनदेखी का आरोप  

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रांची
झारखंड में राजनीतिक तापमान एक बार फिर चढ़ता नज़र आ रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य  सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अपने दो अलग-अलग ट्वीट्स के माध्यम से मरांडी ने जहां एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को हाउस अरेस्ट यानी नजरबंद किए जाने की सूचना को "लोकतंत्र की हत्या" बताया, वहीं दूसरी ओर सूर्या हांसदा एनकाउंटर को "सुनियोजित साजिश" करार दिया।


पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की नज़रबंदी पर तीखा प्रहार
मरांडी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री  चंपई सोरेन को उनके घर में पुलिस द्वारा नज़रबंद किए जाने की सूचना चिंताजनक है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के खिलाफ बताया और दावा किया कि भाजपा, एक सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाते हुए, हमेशा आदिवासी समाज के हक और अधिकारों की रक्षा करती रहेगी। उन्होंने सख्त लहजे में कहा, "हेमंत सरकार कान खोलकर सुन ले, आदिवासियों की एक इंच जमीन भी लूटने नहीं दी जाएगी।"


सूर्या हांसदा एनकाउंटर को बताया "फर्जी", मीडिया की भूमिका की सराहना
दूसरे ट्वीट में मरांडी ने सूर्या हांसदा एनकाउंटर को "फर्जी" करार देते हुए आरोप लगाया कि वे खनन माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के लिए बाधा बन गए थे, इसलिए उन्हें एक साजिश के तहत मारकर एनकाउंटर का रूप दे दिया गया। उन्होंने कहा कि झारखंड की संस्थाएं सत्ता की कठपुतली बन चुकी हैं और मीडिया ने इस मामले में सच उजागर करने का साहस दिखाया है।
मरांडी ने आगे यह भी कहा कि दो आदिवासी पत्रकारों की गिरफ्तारी यह साफ संकेत है कि सरकार सच्चाई सामने आने से घबरा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब मुख्यमंत्री की जानकारी और सहमति के बिना संभव नहीं हो सकता।


 

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