logo

संदिग्ध परिस्थितियों में हथिनी की मौत, 6 दिन में दूसरी घटना

संदिग्ध परिस्थितियों में हथिनी की मौत, 6 दिन में दूसरी घटना

द फॉलोअप डेस्क, रांचीः

चाईबासा के नोवामुंडी वन क्षेत्र के बड़ाजामदा सब-बीट अंतर्गत टांकुरा गांव (बुरमासाई) के पास मंगलवार देर रात एक हथिनी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। 30 अक्टूबर को सिंदरीगौरी में कुएं में गिरने से हुई हथिनी की मौत के महज छह दिन बाद यह दूसरी घटना है। बीते एक साल में इस क्षेत्र में 10 हाथियों की जान जा चुकी है। लगातार हो रही मौतों ने वन्यजीवों की सुरक्षा और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार रात करीब 20 हाथियों का झुंड, जिसमें तीन बच्चे भी शामिल थे, जिकीलता से लांदुब गेना जंगल की ओर जा रहा था। ग्रामीणों के शोर मचाने पर झुंड टांकुरा स्कूल साई की ओर मुड़ गया। इस दौरान तीन किसानों की करीब डेढ़ एकड़ धान की फसल रौंद दी गई। बुधवार सुबह ग्रामीणों ने खेत में हथिनी का शव देखा और वन विभाग को सूचना दी। ग्रामीणों की सूचना के बावजूद विभागीय टीम करीब आठ घंटे की देरी से दोपहर एक बजे जेसीबी लेकर मौके पर पहुंची। इससे पहले सुरक्षा के नाम पर चार वनकर्मियों को लाठी-डंडों के साथ भेजा गया था।

ओडिशा की टीम ने जताई जहरीला पदार्थ खाने की आशंका

घटना की जानकारी मिलने पर सीमावर्ती ओडिशा के नालदा सेक्शन से पांच सदस्यीय वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों से पूछताछ के बाद टीम ने हथिनी की मौत जहरीला पदार्थ खाने से होने की आशंका जताई। रेंजर जितेंद्र प्रसाद सिंह की मौजूदगी में पशु चिकित्सकों ने शव का पोस्टमार्टम किया और बाद में उसे वहीं दफना दिया गया। रेंजर ने बताया कि मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए विसरा सैंपल फॉरेंसिक लैब भेजे जा रहे हैं। रिपोर्ट करीब 15 दिनों में आने की उम्मीद है।

हाथियों की मौत और फसल नुकसान से ग्रामीणों में चिंता

छह दिनों के भीतर दो हथिनियों की मौत और एक साल में 10 हाथियों के मारे जाने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय बन गई हैं। एक ओर हाथियों के झुंड किसानों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अधूरे सिंचाई कुओं और संदिग्ध परिस्थितियों में हाथियों की मौत जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने क्षेत्र में हाथियों और ग्रामीणों, दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत को रेखांकित किया है।

Tags - Elephant Death Wildlife Conservation Noamundi West Singhbhum Forest Department