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जामताड़ा में डीवीसी विस्थापितों का आंदोलन समाप्त, प्रबंधन से वार्ता में छह मांगों पर बनी सहमति

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जामताड़ा 
जामताड़ा में डीवीसी विस्थापितों का आंदोलन प्रबंधन के साथ हुई वार्ता के बाद समाप्त हो गया। विस्थापितों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिनभर धरना-प्रदर्शन किया और डीवीसी के मुख्य गेट को जाम रखा। आंदोलन में बड़ी संख्या में पुरुषों के साथ महिलाओं की भी भागीदारी रही। शाम करीब पांच बजे डीवीसी प्रबंधन ने छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को वार्ता के लिए आमंत्रित किया। कई दौर की बातचीत के बाद विस्थापितों की छह प्रमुख मांगों पर सहमति बनी, जिसके बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया। वार्ता के दौरान डीवीसी प्रबंधन ने आश्वासन दिया कि सीएसआर मद के तहत जामताड़ा के विस्थापित गांवों में विकास कार्य कराए जाएंगे और इन कार्यों में स्थानीय विस्थापितों को प्राथमिकता दी जाएगी।

सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने का आश्वासन

इसके अलावा जिन विस्थापितों को अब तक तीन लाख रुपये का मुआवजा नहीं मिला है, उन्हें जल्द ही साढ़े चार लाख रुपये का मुआवजा उपलब्ध कराया जाएगा। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि जामताड़ा जिले के जिन लोगों की जमीन डीवीसी परियोजना के लिए अधिग्रहित की गई है, उनके मामलों की जांच कराई जाएगी। वहीं विस्थापितों ने सवाल उठाया कि जब जमीन डीवीसी के अधीन है और जलाशय में डूबी हुई है, तब भी जमीन मालिकों से लगान क्यों वसूला जा रहा है। इस संबंध में जांच कराने पर सहमति बनी। विस्थापितों की एक अन्य महत्वपूर्ण मांग पर डीवीसी प्रबंधन ने परियोजना के लिए अधिग्रहित भूमि की लीज अवधि से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने का आश्वासन दिया।

पेयजल समस्या के समाधान के लिए डीवीसी की ओर से जल्द सर्वे

साथ ही वर्ष 1978 में विस्थापितों की रोजगार पैनल सूची से हटाए गए नामों की समीक्षा कर उन्हें पुनः जोड़ने की प्रक्रिया शुरू करने पर भी सहमति बनी। पेयजल समस्या के समाधान के लिए डीवीसी की ओर से जल्द सर्वे कराकर विस्थापित गांवों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया। वार्ता के बाद विस्थापित नेताओं ने इसे आंदोलन की पहली बड़ी सफलता बताया और कहा कि यदि तय समय सीमा में आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ तो भविष्य में फिर से आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष बसु महतो, जामताड़ा जिला अध्यक्ष अकबर अंसारी, पंचेत विस्थापित समिति के अध्यक्ष मुख्तार अंसारी, सुरेंद्र मुर्मू, फुरकान अंसारी सहित बड़ी संख्या में विस्थापित और समिति के सदस्य मौजूद थे।

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