जमशेदपुर
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के परिवार की नई राजनीतिक सक्रियता के बीच पोटका विधानसभा क्षेत्र के मुद्दों को लेकर मंगलवार को भारी बवाल हुआ। पूर्व सीएम की पुत्री दुखनी सोरेन के नेतृत्व में करीब 300 ग्रामीणों ने पारंपरिक व्यवस्था की अनदेखी और 'जल-जंगल-जमीन' के मुद्दों पर उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान दुखनी सोरेन ने कार के बोनट पर खड़े होकर न सिर्फ भीड़ को संबोधित किया, बल्कि प्रशासन को अपनी मांगों को पूरा करने के लिए 15 दिनों का अल्टीमेटम भी दे दिया। इस हाई-वोल्टेज प्रदर्शन के बाद पोटका की राजनीति में दुखनी सोरेन की एंट्री को लेकर कयासबाजी तेज हो गई है।
कार के बोनट से दुखनी सोरेन की दहाड़
चंपाई सोरेन की पुत्री दुखनी सोरेन के नेतृत्व में निकले इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। जुलूस की शक्ल में उपायुक्त कार्यालय पहुंचे ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर दुखनी सोरेन ने डीसी कार्यालय के मुख्य गेट के पास अपनी कार के बोनट पर खड़े होकर लोगों को संबोधित किया, जिसने पूरे कार्यक्रम को एक अलग राजनीतिक रंग दे दिया। सभा को संबोधित करते हुए दुखनी सोरेन ने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी आदिवासी संस्कृति, परंपरा और जल-जंगल-जमीन से जुड़ी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि विकास कार्यों में स्थानीय समुदाय, पारंपरिक ग्राम प्रधानों और युवाओं की भूमिका तय होना बेहद जरूरी है, क्योंकि स्थानीय भागीदारी के बिना थोपा जा रहा विकास मॉडल लोगों में असंतोष पैदा कर रहा है।
उपायुक्त कार्यालय पहुंचे आक्रोशित ग्रामीण
जानकारी के अनुसार, पोटका विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों में स्थानीय आदिवासी समाज की भागीदारी, जल-जंगल-जमीन से जुड़े मुद्दों और पारंपरिक व्यवस्था की अनदेखी के आरोपों को लेकर मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और पारंपरिक ग्राम प्रधान उपायुक्त कार्यालय पहुंचे थे। ग्रामीणों और प्रतिनिधिमंडल का आरोप था कि पोटका क्षेत्र में चल रहे कई विकास कार्यों में स्थानीय माझी बाबा, ग्राम प्रधानों और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि धुमकुड़िया भवन और रंकिनी मंदिर परिसर सहित अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं में स्थानीय सामाजिक संरचना और पारंपरिक व्यवस्था की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
सीएनटी-एसपीटी एक्ट और पेसा कानून को प्रभावी बनाने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने सीएनटी-एसपीटी एक्ट के अनुपालन, पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, अवैध खनन पर रोक और भूमि संबंधी मामलों में स्थानीय समुदाय की भूमिका को लेकर भी प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान दुखनी सोरेन ने प्रशासन को 15 दिनों का समय देते हुए चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द ही सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो पोटका विधानसभा क्षेत्र में एक वृहद जनसभा और महापंचायत आयोजित कर आगे के उग्र आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा तेज
इस सक्रिय मौजूदगी और आक्रामक नेतृत्व को लेकर अब राजनीतिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसे पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन के परिवार की नई राजनीतिक सक्रियता और जमीन तैयार करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सियासी गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि भविष्य में पोटका विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में दुखनी सोरेन की भूमिका बढ़ सकती है, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गौरतलब है कि इससे पहले चंपई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन ने भी पोटका क्षेत्र में संगठनात्मक सक्रियता दिखाई थी, लेकिन बाद में उन्होंने अपना राजनीतिक फोकस घाटशिला क्षेत्र की ओर स्थानांतरित कर लिया।