द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. करमा उरांव के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि डॉ. करमा उरांव आदिवासी समाज के उत्थान व झारखंडी सभ्यता, संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन को लेकर हमेशा समर्पित एवं प्रयत्नशील रहें हैं। वे अपने आप में एक संस्था थे। झारखंड की समृद्ध संस्कृति को आगे बढ़ाने और आदिवासियों की पहचान बनाए रखने के लिए वे अपनी अंतिम सांस तक लड़ते रहे। उनके योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता।

क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा को लेकर रहते थे चिंतित
डॉ. करवा उरांव झारखंड के जाने माने शिक्षाविद और सामाजिक क्रांतिकारी थे। 72 साल की उम्र में उन्होंने रविवार की सुबह अंतिम सांस ली। वह बीते कुछ महीनों से बीमार थे। वर्तमान में रांची के एक अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था, वहीं निधन हुआ। क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषा को लेकर वह हमेशा ही चिंतित रहते थे। राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर प्रमुखता से अपनी बात रखने के लिए उन्हें जाना जाता था। डॉ. उरांव हमेशा कहते थे कि जनजातीय भाषा विभाग को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा, ताकि यहां पढ़ाई जा रही भाषाओं की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके। बता दें कि वह BPSC के भी पूर्व सदस्य थे।

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