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मांगे नहीं मानने पर 13 मार्च से झारखंड के डॉक्टर करेंगे अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार

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द फॉलोअप डेस्क
आईएमए व झासा ने राज्य में सांकेतिक हड़ताल कर ओपीडी व अन्य स्वास्थ्य सेवाएं 01 मार्च को ठप रखी। इसके बाद देर शाम आईएमए व झासा की संयुक्त बैठक हुई। जिसमें आईएमए के स्टेट प्रेसिडेंट डॉ. प्रदीप सिंह ने कहा कि हमें चैंबर ऑफ कॉमर्स, हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन, एएचपीआई और ड्रगिस्ट एंड कैमिस्ट एसोसिएशन का पूर्ण समर्थन मिला है इनके सदस्य बैठक में शामिल हुए बैठक में डॉक्टरों ने कई निर्णय लिए। उन्होंने अपनी मांगों पर विचार करने के लिए 12 मार्च तक का समय सरकार को दिया है। डॉक्टरों ने कहा कि सरकार ने मांगे नहीं मानी तो वे 13 मार्च से अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।

बैठक में ये लिए गए निर्णय
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मार्च को रिम्स में सभी डॉक्टर जमा होंगे। वहां से आईएमए भवन तक एक कैंडल मार्च (6 pm) को निकाली जाएगी। उसके बाद एक संवाददाता सम्मेलन किया जाएगा ऐसा ही कैंडल मार्च आईएमए के हर एक ब्रांच के नेतृत्व में पूरे झारखंड में निकाला जाएगा।

-  इसी बीच ये भी निर्णय लिया गया कि राज्यपाल, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और स्वास्थ्य मंत्री से मिलकर अपनी बातों को रखेंगे।

- 10 मार्च को आईएमए भवन में एक संयुक्त बैठक बुलाई जाएगी जिसमें सारी कार्यों की समीक्षा होगी।

- अगर 12 मार्च तक हमारी मांगे पूरी नहीं हुई तो झारखंड के समस्त सरकारी व गैर सरकारी डॉक्टर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार पर चले जाएंगे।

यह है मुख्य मांगे
-मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को लागू किया जाए।
-क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट में 50 बेड अस्पताल व एकल क्लीनिक को बाहर रखा जाए।
-डॉक्टर पर हुए अप्रिय घटनाओं की जांच एवं दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
-स्वास्थ्य सेवा इमरजेंसी सेवा में आता है जिसमें 24*7 का सेवाकाल होता है ।ऐसी परिस्थिति में बायोमेट्रिक अटेंडेंस तर्कसंगत नहीं है। उसकी उपस्थिति कंट्रोलिंग ऑफिसर पर छोड़ देनी चाहिए। अन्य राज्यों में भी यही व्यवस्था लागू है। झारखंड राज्य में पुलिस सेवा को भी बायोमेट्रिक से बाहर रखा गया है।

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