द फॉलोअप डेस्क
गिरिडीह मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के बाघमारा गांव की बंदोबस्ती जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। जमीन पर कथित कब्जा और प्रशासनिक उदासीनता से नाराज़ दलित परिवारों ने शनिवार से जिला समाहरणालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरने पर बैठे पीड़ितों का आरोप है कि बिहार सरकार से वर्ष 1986-87 में बंदोबस्ती के तहत मिली 12.50 एकड़ जमीन पर गांव के ही दबंगों ने कब्जा कर लिया है।
धरना स्थल पर मौजूद भुवनेश्वर तुरी ने बताया कि यह जमीन उनके पूर्वजों को बंदोबस्ती के तहत आवंटित हुई थी और वर्षों से उनका परिवार इस पर खेती करता आ रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने फसल बर्बाद कर जबरन कब्जा जमा लिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
प्रशासन पर लगाया पक्षपात का आरोप
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि प्रशासन को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है। चमेली देवी ने कहा कि दबंगों द्वारा फर्जी कागजात पेश कर उल्टा उनके परिवार पर मुकदमा दर्ज करा दिया गया। अधिकारियों की मिलीभगत से इस मामले को 'सिविल विवाद' बताकर पल्ला झाड़ा जा रहा है। बीते 14 वर्षों से वे जमीन को कब्जे से मुक्त कराने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई है। थक-हारकर अब पूरा परिवार सड़क पर बैठने को मजबूर है।
विवादित जमीन पर दूसरा पक्ष भी कर रहा दावा
इधर, दूसरे पक्ष के बंधन वर्मा और उसके सहयोगियों ने भी इस जमीन पर दावा ठोकते हुए कहा कि वे पिछले 50 वर्षों से उस जमीन पर खेती कर रहे हैं और वहीं रह भी रहे हैं। उन्होंने बंदोबस्ती के दावे को खारिज करते हुए कहा कि एतवारी तुरी, जिनके नाम पर जमीन का दावा किया जा रहा है, एक सरकारी कर्मचारी थे और बंदोबस्ती के पात्र ही नहीं थे।
