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विस्थापन आयोग जमीन पर उतरा, विस्थापितों की समस्याओं का निराकरण बताएगा

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द फॉलोअप डेस्क
राज्य सरकार ने 8 जुलाई 2024 को ही कैबिनेट की बैठक में झारखंड विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन का निर्णय लिया था। अन्यान्य में लिए गए इस निर्णय के बाद बात आगे नहीं बढ़ी थी। लेकिन आज राज्य सरकार ने आज वास्तविक रूप में झारखंड राज्य विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग(गठन, कार्य, दायित्व) नियमावली 2025 को मंजूरी दे दी। आयोग के गठन का उद्देश्य बताते हुए राज्य सरकार ने कहा कि झारखंड में विभिन्न परियोजनार्थ भूमि का अधिग्रहण होते रहा है। इसके कारण होनेवाले विस्थापन से उत्पन्न स्थिति का समाधान जरूरी है। हालांकि पहले से भूमि अर्जन पुनर्वास और पुनर्व्यवस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत कई तरह की अनुश्रवण समितियां गठित है। लेकिन झारखंड में भू-अर्जन से होने वाले विस्थापन का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए वर्षों से विस्थापन आयोग के गठन की मांग की जाती रही है। इसको ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने आज कैबिनेट की बैठक में आयोग के गठन का फैसला किया। साथ ही इसके कार्य एवं दायित्व संबंधी नियमावली को भी मंजूरी दी। मालूम हो कि राज्य में एनएचएआई, एनटीपीसी, गेल, सीसीएल, बीसीसीएल, ईसीएल की योजनाओं के कारण लाखों लोग विस्थापित हुए। इसके अलावा विभिन्न डैमों एवं सिंचाई परियोजनाओं के कारण भी भारी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। 


कार्य एवं दायित्व
आयोग भू-अर्जन से विस्थापित व्यक्ति, परिवार एवं कुटुंब का सामाजिक, आर्थिक अध्ययन एवं सर्वेक्षण करेगा। सामाजिक रूप से पिछड़े व्यक्ति, परिवार या समुदाय की पहचान करेगा। उस क्षेत्र की पहचान करेगा एवं उनके पुनर्वास का सुझाव देगा। अनुसंधान एवं योजना बनाने के लिए सरकारी संस्थाओं को आंकड़े उपलब्ध कराएगा। पुनर्वास योजनाओं के किर्यान्वयन एवं उन्मुखीकरण की समीक्षा करेगा। 


कौन होगा आयोग का अध्यक्ष और सदस्य
सामुदायिक विकास कार्यक्रमों एवं विस्थापन तथा पुनर्वास के क्षेत्र में 10 वर्षों का कार्य अनुभव रखनेवाले व्यक्ति को राज्य सरकार आयोग का अध्यक्ष बनाएगी। आयोग में प्रशासनिक सेवा का रिटायर अधिकारी जो संयुक्त सचिव स्तर से कम का न हो सदस्य होंगे। इसी तरह जिला जज स्तर के विधि विशेषज्ञ इसके दूसरे सदस्य होंगे। इसके अलावा जरूरी समझने पर आयोग में एसटी, एससी एवं ओबीसी समुदाय से तीन सदस्य नामित किए जाएंगे। साथ ही संबंधित क्षेत्र के डीसी, जिला परिषद के अध्यक्ष, संबंधित प्रखंड के प्रखंड अध्यक्ष एवं पारंपरिक ग्राम प्रधान, मानकी मुंडा इसके सदस्य होंगे। सरकार की ओर से अनुदान के रूप में आयोग को समय समय पर राशि उपलब्ध करायी जाएगी।

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