द फॉलोअप डेस्क
परीक्षा और विवाद, शायद झारखंड की अब नियती बन गयी है। झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा हाल में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए झारखंड पात्रता परीक्षा (जेट) का विज्ञापन भी अभ्यर्थियों के लिए सिरदर्द पैदा कर दिया है। राज्य के विश्वविद्यालयों ने वर्षों पहले ग्रेजुएशन एवं मास्टर की परीक्षा पास करने वाले छात्रों का अभी तक कॉलेजों को डिग्री सर्टिफिकेट नहीं भेजा है, लेकिन ऑनलाइन फॉर्म भरने के क्रम में अभ्यर्थियों से डिग्री और उसका नंबर अपलोड करने का ऑप्शन आ रहा है। अब सवाल उठता है कि राज्य सरकार का एक इंस्टीट्युशन डिग्री की सर्टिफिकेट नहीं दे रहा है, दूसरा इंस्टीच्युशन उसी डिग्री की मांग कर रहा है। छात्रों के लिए जले पर नमक यह है कि जेट के लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 6 अक्तूबर है। तीन अक्तूबर तक राज्य के कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद हैं। उसके बाद मात्र तीन दिन का समय शेष है। हजारों छात्रों के पास डिग्री सर्टिफिकेट नहीं है। प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने से फॉर्म फिलअप हो जाने की बात कही गयी है। लेकिन छात्र डिग्री या प्रोविजनल सर्टिफिकेट के लिए कॉलेज और विश्वविद्यालयों का चक्कर लगाते लगाते थक रहे हैं। कल से कॉलेज और विश्वविद्यालय बंद हो गए। अब सवाल उठता है कि जेट परीक्षा का आवेदन नहीं कर पानेवाले उन लाखों अभ्यर्थियों की कहां और क्या गलती है।

विज्ञापन और व्यवहार में विरोधाभास की पराकाष्ठा
जेट के लिए निकाले गए विज्ञापन और फॉर्म भरने की व्यवहारिकता में विरोधाभास की पराकाष्ठा है। जेट के लिए निकाले गए विज्ञापन की धारा 2.1(ii) में मास्टर डिग्री के लिए परीक्षा देने वाले छात्रों को भी फॉर्म भरने की छूट दी गयी है। दूसरी ओर जो मास्टर की परीक्षा पास कर चुके हैं, उनके लिए डिग्री सर्टिफिकेट या प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने की बाध्यता कर दी गयी है। हालांकि विज्ञापन की धारा 5.1.1(ii) डिग्री सर्टिफिकेट या प्रोविजनल सर्टिफिकेट देने की बाध्यता का जिक्र नहीं है। इस धारा में कहा गया है कि फॉर्म भरनेवाले अभ्यर्थी बोर्ड या यूनिवर्सिटी सर्टिफिकेट को अटैच करेंगे, जिसमें उम्मीदवार के साथ साथ उनके माता-पिता का नाम और उम्र की तिथि दर्ज हो। लेकिन ऑनलाइन फॉर्म भरने के क्रम में जब उम्मीदवार एक-एक कर आगे बढ़ता है तो उसे फिर डिग्री सर्टिफिकेट या उसका प्रोविजनल सर्टिफिकेट अटैच करने का ऑप्शन मिल जाता है। वहां डिग्री सर्टिफिकेट और उसका नंबर मांगता है। वहां उम्मीदवार फंस जाता है और उसका ऑनलाइन अप्लीकेशन स्वीकृत नहीं होता है।
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स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र को लेकर भी परेशानी
विज्ञापन में कहा गया है कि अंचलाधिकारी द्वारा 19 जुलाई 2017 से पूर्व निर्गत स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र (लोकल रेजिडेंस सर्टिफिकेट) अमान्य होगा। इसी तरह जाति व अन्य प्रमाण पत्रों के लिए भी अलग अलग फॉर्मेट दिया गया है। उसी फॉर्मेट में ऑनलाइन आवेदन करना है। लेकिन सरकारी कार्यालयों में दुर्गा पूजा की छुट्टी और विधि व्यवस्था की व्यवस्तता के कारण इस तरह के सर्टिफिकेट नहीं बन पा रहे हैं। पहले से ही इन कार्यालयों में हजारों की संख्या में आवेदन लंबित हैं।

नौकरी में रहनेवाले कर्मियों के लिए भी परेशानी
इसी तरह किसी सेवा में रहनेवाले कर्मियों के लिए फॉर्म भरने में भारी परेशानी है। मसलन अगर कोई सिपाही है और वह असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की इच्छा रखते हुए जेट के लिए आवेदन करना चाहता है तो उसे भी ऑनलाइन फॉर्म भरने के क्रम में एनओसी अपलोड करने का ऑप्शन आता है। इस क्रम में एनओसी अपलोड नहीं करने पर ऑनलाइन फॉर्म पूरा नहीं हो पाता। जबकि सरकारी सेवा में रहनेवाले कर्मियों के लिए इतनी जल्दी एनओसी प्राप्त करना मुश्किल हो रहा है। जबकि यहां नौकरी नहीं पात्रता के लिए परीक्षा आयोजित की जा रही है।
