logo

दुमका की आदिवासी दिव्यांग वृद्धा को नहीं मिल रही पेंशन, गांव-गांव भटकने को हुई विवश; मंत्री से मदद की गुहार

PENSON01231.jpg

दुमका
राज्य और केंद्र सरकार की तमाम सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के बावजूद दुमका जिले की एक आदिवासी बुजुर्ग महिला पेंशन जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित है। 80 वर्षीय मैनो मरांडी की हालत इतनी खराब है कि उन्हें दो वक्त की रोटी के लिए भी गांव-गांव भटकना पड़ रहा है। पति की मृत्यु और गंभीर दिव्यांग होने के बावजूद सरकार की किसी योजना का लाभ अब तक उन्हें नहीं मिला है।
फिटकौर्या गांव की रहने वाली मैनो मरांडी न केवल विकलांग हैं, बल्कि पूरी तरह अकेली और बेसहारा जीवन जी रही हैं। उम्र के इस पड़ाव पर जहां उन्हें सहारे की जरूरत है, वहां वे भूख और लाचारी से लड़ रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मैनो मरांडी अक्सर भोजन के लिए इधर-उधर भटकती रहती हैं।


ग्रामीणों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए झारखंड सरकार में मंत्री दीपक बिरुआ से व्यक्तिगत हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि ऐसी हालत में भी मैनो को पेंशन जैसी सुविधा नहीं दी जा रही, तो यह न केवल प्रशासन की असफलता है बल्कि पूरे समाज के लिए भी चिंताजनक संदेश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रखंड कार्यालय की लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के कारण ऐसे जरूरतमंद लोग योजनाओं से वंचित रह जाते हैं। प्रशासनिक उदासीनता की वजह से न सिर्फ मैनो मरांडी, बल्कि कई अन्य बुजुर्ग और दिव्यांगजन भी उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है और मैनो मरांडी समेत सभी पात्र लाभार्थियों को शीघ्र पेंशन और अन्य जरूरी सहायता दिलवाने की अपील की है।


 

Tags - Jharkhand News News Jharkhand Jharkhand।atest News News