रांची
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) रांची महानगर की ओर से वीर शहीद बुधु भगत विश्वविद्यालय (पुराना नाम श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय) में एक प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में जारी की गई अधिसूचना को "तुगलकी फरमान" बताते हुए उसे अत्यंत निंदनीय बताया गया। अभाविप ने इस अधिसूचना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए मांग की है कि इसे तुरंत निरस्त किया जाए, ताकि पूर्व की भांति छात्रों को विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने का अवसर मिलता रहे।

अभाविप की केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य दिशा जी ने कहा कि छात्र हित सर्वोपरि है, और इस अधिसूचना को या तो तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए या उसमें आवश्यक संशोधन कर छात्रों के हितों की रक्षा की जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान विशेष परिस्थितियों में छात्रों के साथ उनके अभिभावक या सहयोगी को प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए।

प्रदेश मीडिया संयोजक गुड्डू राय ने कहा कि छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा संवाद की प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एक अकादमिक और लोकतांत्रिक स्थल है, जहां विद्यार्थियों को अपनी मांगें और समस्याएं शांतिपूर्ण तरीके से रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। ऐसे में शांतिपूर्ण प्रदर्शन या विरोध को अनुशासनहीनता की श्रेणी में रखना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। प्रतिनिधिमंडल में हर्ष राज, अंशुल उज्जैन, आनंद राज, प्रियांशु तिवारी और नितेश यादव शामिल रहे।
