द फॉलोअप डेस्क
झारखंड की पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने बिहार सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पटना स्थित सदाकत आश्रम में प्रेस वार्ता करते हुए उन्होंने कहा, "अगर बिहार में भाजपा-जेडीयू ने लूट-खसोट नहीं की होती, तो हर बहन के खाते में 70,000 रुपये आ चुके होते। पिछले दो दशकों में भाजपा-जेडीयू सरकार ने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं। कैग (CAG) की रिपोर्ट में 70,877.61 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिल पाया है, और रिपोर्ट में गरीबों के लिए खर्च होने वाले पैसे के गबन की आशंका जताई गई है।"
दीपिका पांडेय सिंह ने बिहार सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जेडीयू सरकार ने 94 लाख गरीब परिवारों से यह वादा किया था कि हर गरीब परिवार के खाते में 2-2 लाख रुपये दिए जाएंगे, ताकि वे व्यवसाय शुरू कर सकें। जातिगत सर्वे में बिहार की 64% आबादी को अति गरीब पाया गया था, लेकिन सरकार ने सिर्फ 10,000 रुपये बिहार की 20% बहनों के खाते में डालकर विधानसभा चुनाव में सत्ता की भूख को पूरा किया।
मंत्री ने आगे कहा, "यदि महागठबंधन की सरकार बिहार में बनती है, तो हर महिला को हर साल 30,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। इसके अलावा, हमारी 'माई बहिन मान' योजना के तहत हम हर महिला के खाते में प्रत्येक महीने ढाई हजार रुपये देंगे।" इस दौरान राजेश राम ने सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति बी. आर. गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की निंदा की। उन्होंने कहा, "यह कृत्य केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं था, बल्कि भारत के संविधान, उसकी आत्मा और सामाजिक न्याय के मूल्यों पर सीधा हमला था।"
