रांची
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (दावोस) और यूनाइटेड किंगडम की यात्रा के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड में निवेश और ग्रीन स्टील युग का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। स्टील, पावर, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में निवेश को लेकर राज्य सरकार को कुल ₹1 लाख 27 हजार करोड़ से अधिक के आशय पत्र (LoI) प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों में नवीन जिंदल समूह का लगभग ₹70 हजार करोड़ और टाटा स्टील का ₹11 हजार करोड़ का निवेश शामिल है। इसके अलावा उड़ीसा एलॉय स्टील, रुंगटा माइन्स, अमलगम स्टील एंड पावर, बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड, जय सस्पेंशन लिमिटेड और अंबुजा सीमेंट लिमिटेड जैसी कंपनियों ने भी झारखंड में निवेश के प्रति रुचि दिखाई है।
सरकार और औद्योगिक समूहों के बीच हुए इन समझौतों के बाद झारखंड न केवल स्टील हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, बल्कि ग्रीन एनर्जी और अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग के ग्लोबल सेंटर के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।

लातेहार से बोकारो तक बड़े निवेश प्रस्ताव
राज्य के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए विभिन्न जिलों में बड़े निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। लातेहार में उड़ीसा स्टील अलॉय लिमिटेड ने ₹25,000 करोड़ के निवेश से स्टील और पावर प्रोजेक्ट लगाने का प्रस्ताव दिया है। सरायकेला-खरसावां में रुंगटा समूह ₹10,000 करोड़ से स्टील, पावर और सीमेंट प्लांट स्थापित करेगा।
बोकारो में बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्रीज लिमिटेड ₹1,070 करोड़ की लागत से कोल्ड रोल्ड और Galvalume/ZAM कोटेड स्टील का उत्पादन करेगी। वहीं, पूर्वी सिंहभूम के आदित्यपुर में जय सस्पेंशन ₹255 करोड़ के निवेश से ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स बनाएगी। कांड्रा क्षेत्र में अमलगम स्टील द्वारा ₹4,980 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। इसके साथ ही सिंगापुर की सनशाइन ग्लोबल कैपिटल द्वारा ₹3,000 करोड़ के एआई डेटा सेंटर का प्रस्ताव भी मिला है।
46 हजार से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार का अनुमान
इन निवेश परियोजनाओं से राज्य के स्थानीय युवाओं को सबसे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। अनुमान के अनुसार, 46,555 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उड़ीसा स्टील अलॉय से करीब 20,000, रुंगटा समूह से 6,200, अमलगम स्टील से 3,000, बीएमडब्ल्यू इंडस्ट्रीज से 1,415 और जय सस्पेंशन से 2,500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।
ग्रीन टेक्नोलॉजी और जीरो कार्बन पर फोकस
निवेश प्रस्तावों में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है। EASyMelt और Hisarna जैसी तकनीकों से कार्बन उत्सर्जन में 50 से 80 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य है। सोलर एनर्जी, वाटर रीसाइक्लिंग और ग्रीन स्टील प्रोडक्शन के जरिए झारखंड को सस्टेनेबल इंडस्ट्रियल स्टेट के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
