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CSR के पैसे से तीर्थ और विवाह, विस्थापित आज भी बदहाल; JP पटेल का सांसद पर सीधा आरोप

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हजारीबाग
MMDR बिल को लेकर झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमाती दिख रही है। हजारीबाग में कांग्रेस की प्रेस वार्ता में पूर्व मंत्री, मांडू के पूर्व विधायक और हजारीबाग जिला कांग्रेस अध्यक्ष जयप्रकाश पटेल ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। पटेल ने दो टूक कहा जल, जंगल और जमीन झारखंड का अधिकार है और इसके साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
खनिज संपदा से झारखंड को क्या मिला?
पटेल ने कहा कि झारखंड ने दशकों तक धूल, गर्दा, दुर्घटना और विस्थापन का दंश झेला है। यहां की धरती से खनिज निकला, उद्योग चले, देश को संसाधन मिले, लेकिन जिन लोगों की जमीन गई, जिन गांवों की पहचान मिट गई और जिन परिवारों ने विस्थापन झेला, उनके हिस्से में आखिर क्या आया?
झारखंड आंदोलन की भावना का दिया हवाला
उन्होंने कहा कि झारखंड अलग राज्य की लड़ाई सिर्फ सत्ता हासिल करने के लिए नहीं लड़ी गई थी। इसके पीछे यहां की प्राकृतिक संपदा, जल-जंगल-जमीन और आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की भावना थी। ऐसे में खनिज संपदा से जुड़े कानूनों में बदलाव झारखंड के हितों को नजरअंदाज करके नहीं किया जा सकता।
विपक्ष के वॉकआउट के बीच बिल पारित होने का आरोप
केंद्र पर हमला बोलते हुए पटेल ने कहा कि जिस समय यह बिल दोनों सदनों से पारित कराया गया, उस समय विपक्ष सदन से वॉकआउट कर चुका था। उन्होंने इसे सरकार की हठधर्मिता और आम लोगों के प्रति दुर्भावना का उदाहरण बताया।
पार्टी लाइन से ऊपर उठकर झारखंड के हित में आवाज की अपील
पटेल ने कहा कि मुद्दा कांग्रेस बनाम भाजपा या किसी एक दल का नहीं है। झारखंड का कोई भी नेता, चाहे वह किसी भी पार्टी में हो, अगर वह झारखंड की मिट्टी से जुड़ा है तो उसे पार्टी लाइन से ऊपर उठकर राज्य के हित में आवाज उठानी चाहिए। खनिज संपदा से होने वाला लाभ सबसे पहले उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो वर्षों से विस्थापन, प्रदूषण और बदहाल जिंदगी की कीमत चुका रहे हैं।
हेमंत सोरेन के आंदोलन पर कांग्रेस का रुख साफ
जब द फॉलोअप ने सवाल किया कि मुख्यमंत्री और झामुमो नेता हेमंत सोरेन इस मुद्दे पर बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक चुके हैं, ऐसे में कांग्रेस का रुख क्या होगा? इस पर जयप्रकाश भाई पटेल ने साफ कहा कि कांग्रेस आंदोलन से दूरी नहीं बनाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी पूरे आंदोलन में कदमताल करते हुए सभी के साथ चलेगी और आंदोलन की रणनीति चरणबद्ध तरीके से तय की जाएगी। 
सड़क, पानी और बिजली के मुद्दे पर कांग्रेस का दावा
स्थानीय मुद्दों पर पटेल से सवाल हुआ कि शहर में सत्ता के खिलाफ विपक्ष की भूमिका निभा रही कांग्रेस आखिर सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी समस्याओं पर क्या कर रही है? पटेल ने कहा कि कांग्रेस लगातार मुखर है और अधिकारियों से मिलकर जनता की समस्याओं को उठाती रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के समय हजारीबाग की जनता कई बार मुद्दों से ज्यादा भावनात्मक और धार्मिक नारों के आधार पर मतदान कर देती है।
विस्थापितों के मुद्दे पर स्थानीय सांसद पर निशाना
बड़कागांव के विस्थापितों का मुद्दा उठा तो पटेल ने स्थानीय सांसद पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि CSR फंड का इस्तेमाल विस्थापितों की मूल समस्याओं को दूर करने के बजाय दूसरी योजनाओं में किया जा रहा है।
CSR फंड को लेकर तीर्थ यात्रा और विवाह कार्यक्रम पर सवाल
पटेल ने कहा कि CSR के पैसे से तीर्थ यात्रा और विवाह जैसे कार्यक्रम कराए जा रहे हैं, लेकिन जिन विस्थापितों ने अपनी जमीन और घर खोए, उनकी स्थिति आज भी जस की तस है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद विकास के मोर्चे पर विफल नजर आ रहे हैं।
“पटेल 2.0” पर आंदोलनकारी तेवर का जवाब
प्रेस वार्ता में सबसे दिलचस्प सवाल तब आया जब जयप्रकाश भाई पटेल से पूछा गया कि “पटेल 2.0” अपने पुराने आंदोलनकारी तेवर के साथ कब लॉन्च होगा? पटेल ने जवाब दिया कि मीडिया से उनकी दूरी जरूर बनी रही, लेकिन तेवर बदले नहीं हैं। उन्होंने अपने पिता और झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता स्वर्गीय टेकलाल महतो का जिक्र करते हुए कहा कि वे आज भी उसी आंदोलनकारी विरासत के बेटे हैं।
MMDR बिल से फिर केंद्र में खनिज अधिकारों की बहस
MMDR बिल ने झारखंड की राजनीति में एक बार फिर खनिज, विस्थापन और अधिकार की बहस को केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में अगर कांग्रेस, झामुमो और दूसरे दल इस मुद्दे पर एक मंच पर आते हैं, तो यह लड़ाई महज बिल के विरोध तक सीमित रहेगी या फिर झारखंड के खनिज अधिकारों को लेकर बड़ा राजनीतिक आंदोलन बनेगी इस पर सबकी नजर रहेगी।

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