द फॉलोअप डेस्क
हजारीबाग नगर निगम में फुटपाथ दुकानदारों के नाम पर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का मामला उजागर हुआ है। चार साल पहले नगर निगम की ओर से टेंडर जारी कर फुटपाथ व्यवसाइयों के लिए 100 अस्थायी टीन की दुकानों का निर्माण कराया गया था। इस काम के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए और टेंडर की राशि करोड़ से ऊपर पहुंच गई।.jpg)
लेकिन आज की हकीकत कुछ और ही है। दुकानों की स्थिति इतनी बदतर है कि दुकानों में न तो शटर लगाए गए, न ही ढंग का ढांचा तैयार किया गया। 20–25 दुकानें छोड़कर बाकी या तो आंधी-पानी में उड़ गईं या फिर चोरी की भेंट चढ़ गईं। करोड़ों खर्च होने के बावजूद फुटपाथ दुकानदार अब भी नालियों और सड़कों के किनारे बैठकर सब्जियां बेचने को मजबूर हैं।
जब द फॉलोअप की टीम ने इस मामले पर नगर निगम के अधिकारियों से सवाल किया तो उन्होंने जांच का बहाना बनाकर चुप्पी साध ली। नतीजा यह कि जनता से जुड़ा बड़ा सवाल आज भी अनुत्तरित है।.jpeg)
इसी मुद्दे पर जब द फॉलोअप की टीम सदर विधायक प्रदीप प्रसाद के पास पहुंची, तो उन्होंने नगर निगम अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर करारा हमला बोला। उन्होंने कहा "यह करोड़ों रुपए का नुकसान नहीं, बल्कि करोड़ों की बंदरबांट है। दुकाने बनाने के नाम पर यह लूट का धंधा लगाया गया और उसमें शामिल लोग जनता का पैसा लूटकर ले गए। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।"
इन दुकानों को जिस तरह से बनाया गया है वहां कोई इंसान तो दूर, जानवर भी नहीं बैठ सकता। अगर कोई पदाधिकारी दिनभर उन दुकानों में बैठकर दिखा दे तो मैं उसकी गुलामी करने को तैयार हूं।
उन्होंने आगे कहा कि हजारीबाग के फुटपाथ दुकानदारों के साथ हमेशा छल हुआ है। चाहे कोई भी जनप्रतिनिधि रहा हो, किसी ने भी उनकी भलाई के लिए गंभीरता से नहीं सोचा..जो प्रतिनिधि ईमानदारी से काम करते हैं उनकी वाह-वाही होती है, लेकिन जहां गड़बड़ी हुई है वहां आलोचना भी जरूरी है।
अंत में विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा कि दुर्गा पूजा के बाद इस मुद्दे पर मैं सड़कों पर उतरूंगा और आंदोलन करूंगा। यह सिर्फ दुकानों का मुद्दा नहीं, बल्कि जनता के टैक्स और हक का सवाल है।