द फॉलोअप डेस्क
घाटशिला उप चुनाव की अब किसी भी दिन घोषणा हो सकती है। इसकी उल्टी गिनती शुरू है। इधर राज्य के राजनीतिक दलों ने भी घाटशिला उप चुनाव को लेकर रणनीतिक बैठकें शुरू कर दी है। प्रत्याशियों के नामों को लेकर प्रारंभिक विचार विमर्श जारी है। स्वर्गीय रामदास सोरेन के पुत्र सोमेश सोरेन और पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र बाबूलाल सोरेन घाटशिला में अपना प्रचार अभियान चला रहे हैं। झामुमो और भाजपा के दोनों नेता चुनाव मैदान में ताल ठोक रहे हैं। इसी प्रतिस्पर्द्धा के बीच प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप बलमुचू ने अपने लोगों और समर्थकों के बीच घाटशिला से चुनाव लड़ने इच्छा व्यक्त कर, झामुमो और कांग्रेस का तनाव बढ़ा दिया है। लेकिन जानकार इसे आपदा में कांग्रेस के लिए अवसर के रूप में देख रहे हैं। इसे कांग्रेस के ही शीर्ष नेताओं की रणनीतिक चाल भी बतायी जा रही है।

जानकारी के अनुसार जैसे ही बलमुचू के घाटशिला से चुनाव लड़ने की बातें मीडिया में आने लगी, कांग्रेस तत्काल एक्शन मोड में आ गयी। प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी के राजू ने बिना विलंब किए प्रदेश कांग्रेस कमेटी को घाटशिला में झामुमो उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश जारी कर दिया। इस आदेश की प्रति मीडिया को भी पिछले दरवाजे से उपलब्ध करा दिया गया। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सोशल मीडिया पर के राजू के निर्देश प्रमुखता से प्रकाशित हुए और दिखायी गयी। प्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस को ऐसा करना ही था। क्योंकि घाटशिला विधानसभा क्षेत्र झामुमो की सीटिंग सीट है। वहां से रामदास सोरेन लगातार दो बार चुनाव जीते थे। मंत्री पद पर रहते हुए रामदास सोरेन की मौत के बाद, यह सीट झामुमो छोड़ कांग्रेस के खाते में जाएगी या कोई दूसरा सहयोगी दल इस सीट की मांग करेगा, ऐसा कोई सोच भी नहीं सकता है। इसलिए कांग्रेस प्रभारी को झामुमो उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित कराने का फरमान जारी करना ही था।
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लेकिन जानकार सूत्रों की मानें तो कांग्रेस बलमुचू को चुनाव लड़ने से रोकने के एवज में उन्हें राज्यसभा भेजने का तर्क रख सकती है। कांग्रेस झामुमो के समक्ष यह तर्क रख सकती है कि बलमुचू ने राज्यसभा का टिकट मिलने की शर्त पर ही चुनाव मैदान में उतरने से परहेज किया है। यहां मालूम हो कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से राज्यसभा की एक सीट खाली है। इस सीट के लिए गुरुजी के निधन(चार अगस्त) से छह महीने के भीतर चुनाव होना तय है। राज्यसभा के पिछले चुनाव में झामुमो ने डॉ सरफराज अहमद को अपना प्रत्याशी बनाया था। उस समय भी कांग्रेस ने राज्यसभा की सीट पर अपनी दावेदारी की थी। लेकिन इस तर्क पर कांग्रेस पीछे हटने को तैयार हो गयी कि कल्पना सोरेन के लिए गांडेय की विधानसभा सीट खाली करनेवाले डॉ सरफराज अहमद को झामुमो ने राज्यसभा भेजने का वादा कर चुका है। लेकिन इस बार कांग्रेस किसी भी कीमत पर राज्यसभा सीट पर अपनी दावेदारी से पीछे हटने को तैयार नहीं है। वह बलमुचू के बहाने झामुमो पर दबाव बनाने के साथ साथ पूर्व स्वीकारोक्ति भी करा लेने की रणनीति पर काम कर रही है।

यहां मालूम हो कि राज्यसभा में प्रदीप कुमार बलमुचू को भेजने से कांग्रेस के वोट बैंक का गणित भी सधता हुआ दिखायी पड़ता है। बलमुचू के बहाने कांग्रेस आदिवासियों और ईसाइयों में एक मेसेज दे सकती है। हालांकि शिबू सोरेन का कार्यकाल एक जून 2026 तक ही था। इसलिए राज्यसभा की एक सीट के लिए होनेवाले उप चुनाव में जीतनेवाला प्रत्याशी मुश्किल से 8-9 महीने ही राज्यसभा का सदस्य रहेगा। इसलिए कांग्रेस और झामुमो में समझौते की उम्मीदें ज्यादा बतायी जा रही है। कांग्रेस और झामुमो के बीच राज्यसभा सीट को लेकर अगली लड़ाई मई-जून 2026 में होगी जब दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक साथ दो सीटों के लिए चुनाव होगा।
