द फॉलोअप डेस्क, रांची
केंद्र सरकार द्वारा पारित MMDR कानून के विरोध में रांची जिला कांग्रेस कमिटी ने गुरुवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से विरोध मार्च निकाला जो उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर घेराव में तब्दील हो गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल हुए। घेराव कार्यक्रम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश भी मौजूद रहे। उन्होंने केंद्र सरकार पर राज्यों के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए MMDR कानून का पुरजोर विरोध किया।

जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा
केशव महतो कमलेश ने कहा कि यह कानून राज्य के हितों के खिलाफ है। केंद्र सरकार राज्यों से उनके अधिकार छीनना चाहती है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस कानून के खिलाफ लगातार आवाज उठाएगी और झारखंड में होने वाले आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जब तक यह कानून वापस नहीं लिया जाता, तब तक झारखंड में महागठबंधन की सरकार और कांग्रेस पूरी ताकत के साथ इसके खिलाफ प्रदर्शन करती रहेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी कानून के विरोध में आंदोलन को मजबूत करने का आह्वान किया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि MMDR कानून को लेकर पार्टी का विरोध केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में इसे लेकर राज्यभर में आंदोलन को तेज किया जाएगा।

क्या है MMDR संशोधन बिल?
संसद ने Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा और लोकसभा में इस बिल को मंजूरी दे चुका है। इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य खनन क्षेत्र में टैक्स और शुल्क की व्यवस्था को आसान, एक जैसी और पहले से अनुमान लगाने योग्य बनाना है। विधेयक में एक नया Section 9D जोड़ा गया है। इसके तहत राज्यों के खनिजों पर अलग से टैक्स या शुल्क लगाने के अधिकार को सीमित किया गया है।
अब राज्य सरकारें खनिज अधिकार या खनिज वाली जमीन पर खनिज की मात्रा, कीमत, रॉयल्टी या किसी अन्य आधार पर टैक्स, उपकर या शुल्क नहीं लगा सकेंगी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा तय नियमों, शर्तों और सीमाओं के अनुसार ही राज्य ऐसा शुल्क लगा सकते हैं। इसका उद्देश्य खनन कंपनियों के लिए नियमों को अधिक स्पष्ट और एक समान बनाना है।
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