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झारखंड से पढ़ने की अनिवार्यता खत्म, संशोधित नियोजन नीति पर हेमंत कैबिनेट की लगी मुहर

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द फॉलोअप डेस्क
झारखंड की नियोजन नीति को संशोधित किया गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर भी लग गई है। इसके साथ ही अब सरकारी नौकरियों में झारखंड से ही मैट्रिक और इंटर पास होने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया गया। स्थानीय रीति रिवाज और परंपरा को भी जानना अब जरूरी नहीं रहा। वहीं, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा इंटर, टेन प्लस टू का संचालन नियमावली में भी संशोधन किया गया। इसमें क्षेत्रीय भाषाओं के अतिरिक्त हिंदी, अंग्रेजी के साथ अब संस्कृत को भी जोड़ा गया है। यह सारे नियम कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा स्नातक स्तर नियमावली मैट्रिक दसवीं पास नियमावली और डिप्लोमा नियमावली में लागू होगा। नगर विकास विभाग ने इसके अंतर्गत झारखंड नगरपालिका नियमावली में भी संशोधन कर दिया है। इसके तहत पदों में 60 प्रतिशत आरक्षण का पालन होगा। 60 प्रतिशत आरक्षण में अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति, ओबीसी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग शामिल रहेंगे। जबकि, 40 प्रतिशत सीट पूरी तरह ओपन रहेगी। कैबिनेट सचिव सचिव अजय कुमार सिंह ने कैबिनेट में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। कैबिनेट में कुल 37 प्रस्ताव पारित किए गए हैं।

मैट्रिक-इंटर के टॉपरों को अब मोबाइल व लैपटॉप भी देगी सरकार
कैबिनेट की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि
झारखंड से मैट्रिक और इंटर परीक्षा में फर्स्ट आने वाले को 3 लाख रुपए, सेकंड आने वाले स्टूडेंट को 2 लाख और थर्ड आने वाले को 1 लाख रुपए मिलेंगे। इसके अलावा प्रोत्साहन राशि के साथ मोबाइल और लैपटॉप भी दिया जाएगा। इसके अलावा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए अब ओलंपिक में गोल्ड जीतनेवाले खिलाड़ियों को दो करोड़ की जगह 5 करोड़ मिलेगा इसी तरह अन्य पदक के लिए भी अलग-अलग राशि का प्रावधान किया गया है।

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