द फॉलोअप डेस्क
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विभागीय सचिवों और आलाधिकारियों के साथ पहली बार पेसा एक्ट और संबंधित ड्राफ्ट नियमावली की गहन समीक्षा की। लगभग डेढ़ घंटे तक मुख्यमंत्री ने नियमावली के एक एक प्रावधान की जानकारी ली। नियमावली की बारीकियों को जाना। मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में आयोजित इस बैठक में उन्होंने राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में पारंपरिक एवं स्थानीय स्वशासन व्यवस्था के तहत ग्राम सभाओं को प्रदत की जाने वाली शक्तियों, अधिकारों और कार्यों से संबंधित पेसा नियमावली के विभिन्न उपबंधों पर विस्तृत चर्चा भी की। पेसा नियमावली के लागू होने से पड़ने वाले प्रभावों को भी समझा। साथ ही पंचायती राज विभाग को पेसा नियमावली के ड्राफ्ट की फिर से समीक्षा करने और अन्य विभागों को उस ड्राफ्ट पर अविलंब मंतव्य देने का निर्देश दिया। मालूम हो कि 23 सितंबर को झारखंड हाईकोर्ट में फिर पेसा नियमावली से जुड़ी अवमानना याचिका पर सुनवाई होनी है।

समीक्षा के क्रम में पाया गया कि कई विभाग पेसा नियमावली से जुड़े प्रावधानों को लागू भी कर रखा है। फिर भी मुख्यमंत्री ने विभागों को यह दुरुस्त कर लेने का निर्देश दिया कि पेसा नियमावली और विभागीय प्रावधान कहीं विपरीत तो नहीं है। इसमें किसी तरह की तकनीकी समस्याएं तो पैदा नहीं होंगी। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के तहत किए गए उपबंधों का क्रियान्वयन इस तरह हो, जिससे राज्य के अनुसूचित क्षेत्र में स्थानीय स्वशासन की परंपरा को मजबूती मिलने के साथ जनजातीय समुदायों का आर्थिक- सामाजिक उत्थान और सशक्तिकरण हो सके।
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इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्रधान सचिव वंदना दादेल, प्रधान सचिव एमआर मीणा, महाधिवक्ता राजीव रंजन,विधि विभाग के प्रधान सचिव नीरज कुमार श्रीवास्तव, सचिव प्रशांत कुमार , सचिव अमिताभ कौशल, सचिव कृपानंद झा , सचिव के श्रीनिवासन, सचिव मनोज कुमार, सचिव चंद्रशेखर, सचिव अरवा राजकमल, सचिव मनोज कुमार, पंचायती राज निदेशक राजेश्वरी बी, निदेशक खान राहुल सिन्हा, पीसीसीएफ अशोक कुमार, वन संरक्षक पीआर नायडू, डीएफओ दिलीप कुमार, विशेष सचिव प्रदीप कुमार हजारी और संयुक्त सचिव रवि शंकर विद्यार्थी मौजूद थे।
