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नदियां-तालाब-बांध झारखंड की जीवनरेखा, इन पर अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं; बोले सीएम हेमंत

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रांची:

मुख्यमंत्री हेमंत  सोरेन ने कहा कि शहरों की नदियां, तालाब, बांध और नालियां समेत अन्य जलस्त्रोत झारखंड की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि जलस्त्रोतों पर अतिक्रमण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शुक्रवार (29 मई) को शहरी विकास एवं आवास विभाग की बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हु कहा कि शहरों से होकर गुजरने वाली नदियों, नालियों, तालाबों, बांधों सहित अन्य जलस्त्रोतों में बने अवैध घरों और अन्य निर्माण कार्यों को तत्काल रोका जाए। पहले से बने घरों को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। 

अतिक्रमण करके बनाए घरों का तत्काल सर्वेक्षण हो
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अतिक्रमण करके बनाए गए घरों का तत्काल गहन सर्वेक्षण किया जाए, साथ ही शहरी निकायों में नदियों या अन्य जलस्त्रोतों में किए गए अवैध निर्माणों की पहचान की जाए। सीएम ने इन्हें लिखित नोटिस जारी करने को कहा और साथ ही निर्देश दिया कि यदि लोग अतिक्रमण नहीं हटाते हैं तो उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि अवैध अतिक्रमण से बनी संरचनाओं के खिलाफ युद्धस्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाए।

अतिक्रमण करके घर बनाना पर्यावरण के लिए खतरा
सीएम हेमंत ने कहा कि नदी के किनारों और अन्य जल स्रोतों के क्षेत्रों में अतिक्रमण करके घर बनाना पर्यावरण और जल निकासी व्यवस्था के लिए एक गंभीर खतरा है। ऐसे कार्य बिल्कुल भी क्षम्य नहीं हैं, और ऐसे कार्य करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से भी अपील की है कि वे जलस्त्रोतों के आसपास अवैध अतिक्रमण करके किसी भी प्रकार की संरचना न बनाएं। प्रकृति, पर्यावरण और झारखंड के भविष्य की रक्षा करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। 
 

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