द फॉलोअप डेस्क
राज्यपाल-सह-कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि यह उपाधि केवल एक प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि आपके सपनों,संघर्ष और जिम्मेदारियों का प्रतीक है। आप सभी केवल अपने कैरियर तक सीमित न रहकर समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए संकल्पित हों। उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय महान स्वतंत्रता सेनानी नीलाम्बर एवं पीताम्बर के नाम पर स्थापित है। उनका जीवन सबको साहस, कर्तव्य और त्याग की प्रेरणा देता है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित में सदैव तत्पर रहें। राज्यपाल आज पलामू स्थित नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों को संबोधित कर रहे थे।
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राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नियमित कक्षाएँ संचालित करने, समय पर परीक्षा आयोजित करने और विद्यार्थियों को बिना विलम्ब डिग्री प्रदान करने का सुझाव व निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह का विलम्ब केवल विद्यार्थियों को ही नहीं बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज को प्रभावित करता है। विश्वविद्यालयों को हर हाल में अकादमिक कैलेण्डर का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि उनका स्पष्ट निदेश है कि विद्यार्थियों को हर हाल में गुणात्मक शिक्षा उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारा राज्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी बहुत पीछे है। राज्य के बाहर के विद्यार्थी यहाँ नामांकन तो नहीं ही लेते हैं,साथ ही ये भी देखने को मिलता है कि यहाँ के अनेक विद्यार्थी उच्च शिक्षा के लिए बाहर पलायन करते हैं। इस स्थिति को बदलना अत्यंत आवश्यक है।

राज्यपाल ने कहा कि हमारा देश ‘विकसित भारत@2047’ के संकल्प की ओर अग्रसर है और इसमें युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि से बनी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, शिक्षा को रोजगारोन्मुख, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बना रही है। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वालों में छात्राओं की संख्या छात्रों की अपेक्षाकृत अधिक देखने को मिल रही है, जो महिला सशक्तिकरण और विकसित भारत की सशक्त झलक प्रस्तुत करती है। संतोष गंगवार ने कहा कि ज्ञान ही सबसे बड़ी पूँजी है और इसी पूँजी से राष्ट्र को नई ऊँचाइयों तक ले जाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण पर बल दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय में स्वच्छ, सुन्दर और अच्छा माहौल की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, कौशल और प्रतिभा का उपयोग समाज में शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए करें। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय परिसर में महर्षि विश्वामित्र केन्द्रीय पुस्तकालय का लोकार्पण किया।
