रांची
झारखंड के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र के करीब पांच महीने बीतने के बावजूद छात्र-छात्राओं को अब तक नई पोशाक या उसकी राशि नहीं मिल सकी है। नए नामांकित बच्चे बिना यूनिफॉर्म के ही स्कूल पहुंच रहे हैं, जबकि पहले से पढ़ रहे विद्यार्थी पुरानी ड्रेस पहनकर स्कूल आने को मजबूर हैं। राज्य सरकार की ओर से सत्र शुरू होने के साथ ही पोशाक या उसकी राशि उपलब्ध कराने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हो सका है।
पांच महीने बाद भी पोशाक की राशि का इंतजार
राज्य में नया शैक्षणिक सत्र अप्रैल से शुरू हुआ था। इसके बाद करीब पांच महीने बीतने को हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों के बच्चों को पोशाक के लिए निर्धारित राशि नहीं मिल पाई है। पोशाक नहीं मिलने के कारण जूता-मोजा और स्वेटर की खरीदारी भी प्रभावित हो रही है। इससे खासकर गरीब परिवारों के बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
40 लाख बच्चों को मिलनी है पोशाक या राशि
झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 40 लाख छात्र-छात्राओं को पोशाक या उसकी राशि उपलब्ध कराई जानी है। सरकारी व्यवस्था के तहत बच्चों को दो जोड़ी पोशाक दी जाती है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए 600 रुपये, छठी से आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए 700 रुपये और नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं के लिए 1200 रुपये निर्धारित हैं। राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कहीं राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है, तो कहीं पोशाक तैयार कर बच्चों को उपलब्ध कराई जाती है।.jpeg)
नए नामांकित बच्चों के सामने अलग परेशानी
नई कक्षा में नामांकन लेने वाले बच्चों के पास पुरानी यूनिफॉर्म भी नहीं होती। ऐसे में पोशाक नहीं मिलने के कारण वे सामान्य कपड़ों में स्कूल आने को मजबूर हैं। वहीं, पुराने विद्यार्थियों के पास मौजूद यूनिफॉर्म खराब या छोटी होने के बावजूद वे उसी पुरानी ड्रेस से काम चला रहे हैं। इससे स्कूलों में ड्रेस को लेकर बच्चों के सामने परेशानी बनी हुई है।
दो जोड़ी पोशाक के लिए राशि पड़ रही कम
सरकार की ओर से निर्धारित पोशाक की राशि को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। महंगाई बढ़ने के कारण मौजूदा राशि में दो जोड़ी यूनिफॉर्म तैयार कराना मुश्किल हो गया है। कई परिवारों के लिए इस राशि से बमुश्किल एक जोड़ी पोशाक ही खरीदी जा पाती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चे इसी एक जोड़ी यूनिफॉर्म से पूरे सत्र में काम चलाने को मजबूर होते हैं।.jpeg)
राशि बढ़ाने की मांग, अब तक नहीं हुआ बदलाव
महंगाई को देखते हुए पोशाक की राशि बढ़ाने की मांग कई बार उठाई जा चुकी है। इसके बावजूद निर्धारित राशि में अब तक कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है। वहीं, चालू शैक्षणिक सत्र में पांच महीने बीतने के बाद भी पोशाक या राशि नहीं मिलने से बच्चों और अभिभावकों में नाराजगी है। अब स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को पोशाक की राशि या नई यूनिफॉर्म मिलने का इंतजार है।