द फॉलोअप डेस्क
सारंडा सघन वन क्षेत्र को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होनेवाली सुनवाई को राज्य सरकार ने काफी गंभीरता से ले रही है। आठ अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में होनेवाली इस सुनवाई को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मुख्य सचिव अविनाश कुमार दिल्ली में हैं। वहां वे बड़े अधिवक्ताओं से लीगल एडवाइस ले रहे हैं। सरकार की गंभीरता इसी बात से स्पष्ट होती है कि मुख्यमंत्री आठ अक्तूबर को सुनवाई के बाद दिल्ली से रांची लौटेंगे। मालूम हो कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव पांच अक्तूबर की शाम दिल्ली गए।
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मालूम हो कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने आठ अक्तूबर तक सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित नहीं किए जाने पर मुख्य सचिव को जेल भेजने की चेतावनी दी थी। साथ ही आठ अक्तूबर की सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव को अदालत में सशरीर उपस्थित रहने का आदेश दिया था। वैसे सूत्रों का कहना है कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में होनेवाली सुनवाई के दौरान ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की रिपोर्ट पेश कर सकती है। उसमें वन्य जीवों के साथ साथ वन क्षेत्र में रहनेवाले गरीब आदिवासियों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन पर पड़ने वाले असर को रेखांकित कर सकता है। जानकारी के अनुसार वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की टीम पिछले दिनों सारंडा का दौरा किया था। वहां रह रहे लोगों की स्थिति का जायजा लिया था। ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स ने अपनी रिपोर्ट में सारंडा को वाइल्ड लाइफ सेंचुरी घोषित किए जाने पर वन क्षेत्र में रहनेवाले गरीब आदिवासियों के जीवन पर बुरा असर पड़ने की बात कही है।
