logo

सेस की राशि खनन प्रभावित क्षेत्र में खर्च हो, CID  नहीं CBI जांच होः सुदेश महतो

ेेेे.jpg


द फॉलोअप, रांची
आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने गुरुवार को राज्य के संसाधनों के इस्तेमाल, खनिज क्षेत्रों से मिलने वाले सेस, DMFT फंड, सरकार के वित्तीय प्रबंधन और JSSC CGL परीक्षा रद्द किए जाने के मुद्दे पर हेमंत सोरेन सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि झारखंड के खनिज संसाधनों का लाभ राज्य की जनता, खासकर खनन प्रभावित इलाकों के लोगों तक पहुंचना चाहिए। सुदेश महतो ने केंद्र सरकार के MMDR अधिनियम में संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के सेस से जुड़े आदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के हितों की रक्षा के लिए उपलब्ध संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। उन्होंने केंद्र और राज्य के बीच टकराव के बजाय संवाद के जरिए रास्ता निकालने की जरूरत बताई।

धारा 9D के तहत राज्य को मिले सेस लगाने का अधिकार

सुदेश महतो ने कहा कि MMDR अधिनियम में संशोधन के बाद राज्यों के सेस लगाने के अधिकार को लेकर नई व्यवस्था बनी है। उन्होंने विशेष रूप से धारा 9D का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ शर्तों के साथ राज्यों को इस दिशा में अधिकार दिए जाने का रास्ता खुला हुआ है। उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि खनिज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष योजनाएं चलाने की शर्त पर झारखंड सरकार को सेस लगाने की अनुमति दी जाए। उनका कहना था कि इससे राज्य के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास को गति दी जा सकती है। आजसू प्रमुख ने कहा कि खनिज से प्राप्त राशि का इस्तेमाल उन क्षेत्रों के लोगों का जीवन स्तर बदलने के लिए होना चाहिए, जहां से राज्य को खनिज संपदा मिलती है। उन्होंने स्कूलों के बेहतर निर्माण, बच्चों की शिक्षा, कुपोषण से बचाव, स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की बात कही। उनका कहना था कि खनिज क्षेत्रों से मिलने वाली राशि का लाभ सीधे प्रभावित लोगों तक पहुंचे और इसके इस्तेमाल की स्पष्ट निगरानी व्यवस्था होनी चाहिए।

DMFT फंड के इस्तेमाल पर उठाए सवाल

सुदेश महतो ने राज्य में DMFT फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में DMFT फंड के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई हैं और 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले की खबरें प्रकाशित हुई हैं। उन्होंने कहा कि जिस फंड का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और लोगों की जिंदगी बेहतर करना है, उसका इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से होना चाहिए। सुदेश महतो ने राज्य सरकार के बजट खर्च के आंकड़ों का हवाला देते हुए वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले वित्तीय वर्ष में सरकार करीब 25 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर सकी। उनके मुताबिक ग्रामीण विकास की राशि का लगभग 40 प्रतिशत ही खर्च हुआ। आदिवासी कल्याण मद में करीब 56 प्रतिशत और पेयजल एवं स्वच्छता मद में लगभग 56 प्रतिशत राशि खर्च होने का दावा उन्होंने किया। स्वास्थ्य विभाग में करीब 78 प्रतिशत खर्च का आंकड़ा बताया गया। सुदेश महतो ने आरोप लगाया कि दूसरी तरफ सरकार के उन विभागों में खर्च का प्रतिशत अधिक है, जहां कमीशन और उगाही की शिकायतें सामने आती रही हैं। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं और खर्च की दिशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास योजनाओं में राशि का पूरा और प्रभावी इस्तेमाल होना चाहिए।

अवैध खनन और राजस्व को लेकर भी निशाना साधा

आजसू प्रमुख ने राज्य में अवैध खनन और अवैध कारोबार को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से राज्य को राजस्व मिलना चाहिए, लेकिन यदि अवैध बाजार मजबूत होता है तो इसका नुकसान सीधे राज्य और जनता को होता है। उन्होंने कोयला उत्पादन की वृद्धि दर का भी हवाला दिया। दावा किया कि वृद्धि दर 8 प्रतिशत से घटकर करीब 2 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे राज्य में संसाधनों के प्रबंधन और अवैध गतिविधियों से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।

सीबीआई जांच हो, सरकार ने छल किया है
सुदेश महतो ने कहा कि सरकार ने JSSC CGL परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। यह न्यायिक समीक्षा में टिकेगा नहीं, क्योंकि JPSC सरकार के अधीनस्थ नहीं है।
सरकार ने छल किया है, क्योंकि स्वतंत्र निकाय को परीक्षा रद्द करने का अधिकार था।सरकार की CID ने उच्च न्यायालय में रिपोर्ट दी थी कि चयनित अभ्यर्थियों को नौकरी दी जा सकती है। वही CID अब जांच कर रही है और गड़बड़ी बता रही है। पैसा लेकर नौकरी बेचने का आपराधिक मामला सामने आया है। CBI जांच होनी चाहिए, क्योंकि रिटायर्ड जज से यह सही दिशा में नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि मामले में पहले सामने आई जांच रिपोर्ट और वर्तमान कार्रवाई के बीच की स्थिति को सरकार को सार्वजनिक करना चाहिए। 

केंद्र से टकराव नहीं, तथ्यों के साथ पहल करे राज्य सरकार

सुदेश महतो ने राज्य सरकार से केंद्र के साथ संवाद करने की अपील की। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और आंकड़ों के साथ भारत सरकार के सामने अपना पक्ष रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि धारा 9D के तहत शर्तों के साथ सेस लगाने की व्यवस्था संभव है तो राज्य सरकार को इसके लिए केंद्र के पास औपचारिक प्रस्ताव रखना चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सेस से प्राप्त राशि का इस्तेमाल सिर्फ खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में हो।


 

Tags - Sudesh Kumar Mahto AJSU MMDRA CGL DMFT Coal