द फॉलोअप डेस्क
झारखंड प्रारंभिक विद्यालय प्रशिक्षित सहायक आचार्च संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा -2023 में सफलता अर्जित करने के बाद भी कई अभ्यर्थी बुरी तरह फंस गए हैं। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने उनके बीएड कोर्स को लेकर आपत्ति की है। साथ ही प्रमाण पत्रों की जांच के बाद उनके बीएड की डिग्री को अमान्य करार दिया है। दिलचस्प यह है कि अभ्यर्थियों को चार दिन के भीतर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया जा रहा है।
पूरा मामला सरकार, जेएसएससी और इसके शीर्ष पर बैठे अधिकारियों की लापरवाही से उत्पन्न हुई है।

इस प्रतियोगिता परीक्षा के लिए निकाले गए विज्ञापन में एक साल की बीएड डिग्री का होना ही अनिवार्य नहीं किया गया था। इस आधार पर दो वर्षीय बीएड डिग्री धारी अभ्यर्थियों के आवेदन को स्वीकृत कर लिया गया। फिर अभ्यर्थी प्रतियोगिता परीक्षा में सम्मिलित भी हुए। प्रतियोगिता परीक्षा में सफल भी हुए। लेकिन प्रमाण पत्रों की जांच के क्रम में जेएसएससी द्वारा यह तर्क दिया जा रहा है कि सफल अभ्यर्थियों को एक साल वाली बीएड की डिग्री मान्य होगी। जबकि अभ्यर्थियों का कहना है कि इग्नू द्वारा दो वर्षीय पाठ्यक्रम के आधार पर बीएड की डिग्री दी जा रही है। यह पिछले कई वर्षों से जारी है।

देश में इग्नू की दो वर्षीय बीएड की डिग्री को मान्यता भी प्रदान की गयी है। इतना ही नहीं, अगर इग्नू की दो वर्षीय बीएड की डिग्री को मान्यता नहीं थी तो उनके आवेदन कैसे स्वीकृत किए गए। लेकिन जेएसएससी सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए उत्तीर्ण अभ्यर्थियों की मांगों को नजरअंदाज कर रहा है। उसका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि परीक्षा के बीच में नियमावली में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के उसी आदेश में सरकार को किसी विषय पर संशय होने की स्थिति में मार्गदर्शन प्राप्त करने की भी बात कही गयी है। लेकिन ऐसा नहीं करके सफल अभ्यर्थियों के नाइंसाफी की बात कही जा रही है। सफल अभ्यर्थी सरकार और जेएसएससी के स्तर पर न्याय नहीं मिलने पर कोर्ट जाने की मजबूरी बता रहे हैं।
