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8 साल से नहीं हुआ बोकारो ट्रेजरी का निरीक्षण, प्रतिवर्ष जांच जरूरी; ऐसे हुआ स्कैम!

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बोकारो

बोकारो ट्रेजरी में वर्षों से चल रही बड़ी लापरवाही का खुलासा हुआ है। पिछले आठ साल से इस ट्रेजरी का निरीक्षण नहीं हुआ था। बोकारो डीसी अजय नाथ झा की ओर से वित्त विभाग को भेजी गई गोपनीय रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। डीसी ही जिला ट्रेजरी अफसर होते हैं। नियम के मुताबिक उन्हें साल में कम से कम एक बार ट्रेजरी का निरीक्षण करना जरूरी है। अजय नाथ ने रिपोर्ट में कहा है कि वे 27 मई 2025 को बोकारो डीसी बने। इससे पहले 3 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन डीसी मृत्युंजय कुमार वर्णवाल ने बोकारो ट्रेजरी का निरीक्षण किया था। इसके बाद आठ साल तक किसी ने यहां का निरीक्षण नहीं किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान डीसी ने निर्देश दिया है कि हर साल कम से कम दो बार ट्रेजरी में जमा स्टांप की जांच करने का भी आदेश दिया।निरक्षण में मिली गड़बड़िया
रिपोर्ट में कहा गया है कि निरक्षण में कई गड़बड़ियो सामने आई थी। बोकारो ट्रेजरी व तेनुघाटी सब ट्रेजरी में असत्यापित खातों के माध्यम से भुगतान की बात का पता चला था। इसके बाद ऐसे खातों के माध्यम से भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिया था। साथ ही भुगतान हो गए मामलों की पड़ताल करने को कहा था। समुचित तरीके से जांच के बाद उनकी अनुमति से भुगतान का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्होंने मंथली व एनुअल अकाउंट की सामान्य जांच के लिए समिति बनाई। इसमें डीडीसी, अपर समाहर्ता, डीसी के ओएसडी, राज्य कर सहायक आयुक्त और जिला लेखा पदाधिकारी को शामिल किया गया।SIT की टीम आज पहुंचेगी बोकारो
अवैध निकासी की विस्तृत जांच के लिए उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बनी एसआईटी आज बोकारो पहुंचेगी। यह टीम वहां एसपी ऑफिस और ट्रेजरी में फर्जी पेमेंट, टेम्पररी आईडी व बैंक खातों की गहन पड़ताल करेगी। टीम ने इसके लिए एसपी ऑफिस को विस्तृत सूची भेजी थी। इसमें 23 अहम बिंदुओं पर दस्तावेज मांगे गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर जांच टीम फर्जी भुगतान, टेम्पररी आईडी के दुरुपयोग और बैंक खातों में संदिग्ध लेनदेन की जांच करेगी। कार्यालयवार पदवार सूची, बजट प्राक्कलन और आवंटन रजिस्टर की भी जांच होगी, ताकि यह पता चल सके कि स्वीकृत पदों के अनुरूप ही भुगतान हुआ या नहीं। सूत्रों के मुताबिक वेतन से जुड़े मूल दस्तावेज जैसे बिल रजिस्टर, मास्टर रोल पंजी और पे-बिल की भी बारीकी से जांच होगी। खास तौर पर स्थापना मद से निकाले गए विपत्रों की कॉपी और विपत्र पंजी का मिलान भी किया जाएगा। जांच के क्रम में बैंक खातों का विश्लेषण होगा। टीम उन खातों की सूची खंगालेगी जो कर्मचारी मास्टर डेटा में दर्ज नहीं हैं, लेकिन वेतन भुगतान हुआ है। ऐसे खाते भी जांच के दायरे में होंगे, जिनमें खाताधारक का नाम और कर्मचारी का नाम अलग-अलग है। दो लाख रुपए से अधिक वाले खातों के ट्रांजेक्शन डिटेल्स की भी पड़ताल होगी। जीपीएफ और रिटायरमेंट केस भी जांच के घेरे में होगा। इसके साथ ही ट्रेजरी से जीपीएफ निकासी की प्रक्रिया की भी जांच होगी। बिलों में दर्ज पेयी संख्या और ई-पेमेंट स्टेटस में दर्ज संख्या का मिलान होगा।

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