logo

बोकारो में बड़ा वेतन घोटाला, मृत शिक्षक के नाम पर निकाले 14.65 लाख रुपये, बिलिंग असिस्टेंट के खाते में पहुंचे पैसे

Screenshot_2026-08-04_095026.jpg

बोकारो
शिक्षा विभाग में सामने आए वेतन घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। बोकारो जिले के शिक्षा विभाग में भुगतान अनियमितता का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक बिलिंग असिस्टेंट ने वर्ष 2021 में दिवंगत हो चुके शिक्षक के अंतर वेतन वृद्धि (एरियर) के नाम पर तीन अलग-अलग बिलों के माध्यम से 14.65 लाख रुपये का भुगतान अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिया। मामले के उजागर होने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच शुरू कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, पूरी वित्तीय अनियमितता सुनियोजित तरीके से की गई। पेटरवार प्रखंड के मध्य विद्यालय सदमाकला के शिक्षक संतोष कुमार शर्मा का निधन 14 अगस्त 2021 को हो गया था, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम पर जुलाई 2007 से जून 2024 तक की वेतन वृद्धि की गणना कर बिल संख्या 77/2024-25 के माध्यम से 4,31,852 रुपये की निकासी कर ली गई। जांच में माना गया कि मृत्यु के लगभग दो वर्ष 10 माह बाद की अवधि को भी वेतन वृद्धि में शामिल करना जानबूझकर की गई वित्तीय गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
डीडीओ और भुगतान प्रक्रिया पर उठे सवाल
जांच में यह भी सामने आया कि भुगतान से पहले तत्कालीन डीडीओ सह बीईईओ प्रतिमा दास ने आवश्यक सावधानी और सत्यापन नहीं किया। अधिकारियों के अनुसार, डीडीओ पोर्टल की दो-स्तरीय स्वीकृति प्रणाली में निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी की मंजूरी के बिना भुगतान संभव नहीं है। ऐसे में भुगतान प्रक्रिया में कोषागार संहिता और वित्तीय नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई है, जिससे संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
वास्तविक लाभुक को नहीं मिली समय पर राशि
जांच के अनुसार, शिक्षक की मृत्यु के बाद वेतन वृद्धि की राशि उनकी पत्नी किरण शर्मा को मिलनी थी। आरोप है कि बिलिंग इंचार्ज ने तीन किस्तों में कुल 14.65 लाख रुपये अपने खाते में जमा करा लिए और वास्तविक लाभुक को उसकी देय राशि से वंचित रखा। मामला उजागर होने के बाद आरोपी ने चेक के माध्यम से राशि वापस की, लेकिन भुगतान में हुई देरी का ब्याज नहीं दिया गया। अधिकारियों का अनुमान है कि इस अवधि का ब्याज करीब 80 हजार रुपये बनता है।
डिजिटल रिकॉर्ड की जांच में खुला पूरा मामला
यह अनियमितता डीडीओ पोर्टल के डिजिटल सत्यापन, भुगतान अभिलेखों और अन्य रिकॉर्ड की जांच के दौरान सामने आई। जांच में पाया गया कि सरकारी राशि का अनधिकृत हस्तांतरण योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। रिकॉर्ड के मिलान के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि भुगतान प्रक्रिया में कई स्तरों पर नियमों की अनदेखी की गई। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भुगतान के बाद उसका विवरण वेतन भरपाई पंजी में दर्ज ही नहीं किया गया। यह सरकारी वित्तीय प्रणाली के मूल नियमों का उल्लंघन माना गया है। भरपाई पंजी सरकारी भुगतान का प्रमुख अभिलेख होता है, जिसका सही और समय पर संधारण अनिवार्य है। जांच अधिकारियों का मानना है कि रिकॉर्ड में भुगतान दर्ज नहीं करना गलत लेनदेन को छिपाने और उसे वैध स्वरूप देने का प्रयास था। प्रथम दृष्टया इसे विभागीय नियमों के उल्लंघन के साथ-साथ सरकारी अभिलेखों के रखरखाव में गंभीर लापरवाही माना गया है।

Tags - Bokaro Jharkhand Education Department Salary Scam Corruption