बोकारो
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड आंदोलन के प्रखर नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन परसों दिल्ली में हो गया। वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उनके निधन से पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई है। उनका अंतिम संस्कार कल झारखंड के बोकारो जिले स्थित उनके पैतृक गांव नेमरा में राजकीय सम्मान के साथ किया गया।
शिबू सोरेन को पूरे देश से लोग अपने-अपने अंदाज़ में श्रद्धांजलि दे रहे हैं। इसी क्रम में बोकारो के प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट अजय शंकर महतो ने अपनी कला के ज़रिए उन्हें एक खास और भावुक श्रद्धांजलि दी। उन्होंने चंदनक्यारी के दामोदर नदी के किनारे बालू पर दिशोम गुरु की खूबसूरत आकृति उकेरकर उन्हें नमन किया।

यह कलाकृति न सिर्फ देखने वालों को भावुक कर गई, बल्कि दिशोम गुरु के संघर्षों और आदिवासी समाज के लिए किए गए योगदान को भी एक नई पहचान दी। बालू पर उभरी यह छवि, न सिर्फ एक कलाकार की ओर से श्रद्धांजलि है, बल्कि झारखंड के जननेता को जन-जन से जोड़ने वाला एक भावनात्मक माध्यम भी बन गई है।
अजय शंकर महतो ने कहा, "दिशोम गुरु न होते तो शायद झारखंड का अस्तित्व न होता। यह मेरी छोटी-सी कोशिश है उन्हें नमन करने की।" शिबू सोरेन का जीवन संघर्ष और जनसेवा की मिसाल रहा है। झारखंड और आदिवासी समाज के लिए उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा।
