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रांची : "माही ब्लड बॉन्ड" के तहत रांची में रक्तदान शिविर का आयोजन

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रांची

पैग़म्बर-ए-इंसानियत हज़रत मुहम्मद  के जन्म अवसर पर मौलाना आज़ाद ह्यूमेन इनिशिएटिव (माही) की स्वास्थ्य मुहिम “माही ब्लड बॉन्ड” के तहत गुलशन हॉल, कर्बला चौक में रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। इस मौके पर लगभग 25 लोगों ने स्वेच्छा से रक्तदान कर मानवता की सेवा की।
मुख्य अतिथि रांची के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने “रक्तदान और मानवता” विषय पर कहा, “सभी दानों में रक्तदान सर्वोत्तम है। यह दान न जाति देखता है, न धर्म। जब कोई इंसान अपना जीवनदायिनी रक्त किसी जरूरतमंद को देता है, तो वह उसकी जान बचाने के साथ इंसानियत की मिसाल पेश करता है। माही ब्लड बॉन्ड जैसी पहल समाज में स्वास्थ्य-जागरूकता और करुणा की प्रतीक है।”


विशिष्ट अतिथि डॉ. रंजू ने “रक्तदान और स्वास्थ्य लाभ” पर बोलते हुए कहा, “सिर्फ स्वस्थ व्यक्ति ही रक्तदान कर सकता है और नियमित रक्तदान करने से स्वास्थ्य और बेहतर होता है। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और व्यक्ति को सक्रिय बनाए रखता है।”
ए.सी.एम.ओ., सदर अस्पताल रांची, डॉ. ताबां रिज़वी ने भ्रांतियों को दूर करते हुए कहा, “यह सोचना गलत है कि रक्तदान से स्वास्थ्य बिगड़ता है। सच्चाई यह है कि नियमित रक्तदान करने वाले लगभग 90% लोग हृदयाघात से सुरक्षित रहते हैं। रक्तदान स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुँचाता बल्कि इसे और मजबूत बनाता है।” झारखंड अंजुमन के संयोजक जुनैद अनवर ने कहा, “लहू हमें सिखाता है कि हम सब एक ही इंसानियत के रिश्ते से जुड़े हैं। रक्तदान ऐसा दान है जहाँ न जाति पूछी जाती है, न धर्म। यही वजह है कि यह इंसानियत की सबसे बड़ी पहचान है।” उन्होंने पलामू (बालूमाथ) में झारखंड अंजुमन द्वारा लगाए गए रक्तदान शिविर का ज़िक्र किया, जहाँ 141 लोगों ने रक्तदान कर नबी को सच्ची श्रद्धांजलि दी।

वक़्फ़ बोर्ड झारखंड के सदस्य और “माही” व “समझ” के संयोजक इबरार अहमद ने युवाओं के उत्साह की सराहना करते हुए कहा, “आज जब समाज को तोड़ने वाली ताकतें सक्रिय हैं, ऐसे में इंसानियत के लिए खून देने वाले नौजवान यह साबित कर रहे हैं कि इंसानियत ज़िंदा है। यह खून न जाने किन घरों की खुशियों की वजह बनेगा। यही सबसे बड़ा नेक अमल है।” उन्होंने बताया कि इस मुहिम में कई बार रक्तदान करने वाले युवा भी शामिल हैं—जावेद अख्तर (63 बार) और नदीम अख्तर (54 बार)। कार्यक्रम का संचालन माही के वक्ता मुस्तकीम आलम ने किया और धन्यवाद ज्ञापन जमीयतुल इराक़ीन के सचिव सैफुल हक़ ने दिया।
इस मौके पर डॉक्टरों, वकीलों और समाजसेवियों के अलावा तंज़ीम आलम, मोहम्मद ओसामा, नूर अहमद, अख्तर गद्दी, मोहम्मद सलाहउद्दीन, मावा के तनवीर मुजीब, तबरेज़ अज़ीज़, ज़ुबैर खान, जावेद अख्तर, सोहैल अनवर, मोहम्मद शमीम, माहताब आलम, जुहैब, मोहम्मद इमरान, जमील, अब्दुल वाहिद, मेराज गद्दी, साजली, मोहम्मद जावेद, बारिश कुरैशी, सैफुल्लाह, सुफियान साहब, डॉ. इरफ़ान, आनन्त शर्मा, निसाद खान समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।


 

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