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रांची में आदिवासी अस्तित्व बचाने को निकली बाइक रैली, कुरमी समाज को ST दर्जा देने का विरोध

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रांची

आदिवासी समाज के अस्तित्व और पहचान की रक्षा को लेकर रविवार को राजधानी की सड़कों पर जोरदार बाइक रैली निकाली गई। यह रैली आदिवासी अस्तित्व बचाव मोर्चा के बैनर तले आयोजित हुई, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी संगठन से जुड़े लोग शामिल हुए।
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की की अगुवाई में रैली मोरहाबादी मैदान से शुरू होकर हरमू रोड और अरगोड़ा होते हुए बिरसा मुंडा चौक तक पहुंची। वहां भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का संकल्प लिया गया।


कुरमी समाज को एसटी दर्जे के खिलाफ विरोध
इस रैली का मुख्य उद्देश्य कुरमी समाज को अनुसूचित जनजाति (एसटी) सूची में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध करना था। बाइक रैली में शामिल युवाओं ने जमकर नारेबाजी की और साफ कहा कि कुरमी को किसी भी हाल में आदिवासी नहीं माना जा सकता। अजय तिर्की ने कहा कि अगर आदिवासी समाज का अस्तित्व खत्म हुआ, तो आरक्षण और अधिकारों पर खतरा मंडराने लगेगा। उनका आरोप था कि कुरमी समाज झूठे दावों के जरिए आरक्षण पर कब्जा करना चाहता है।
सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने इस पूरी कवायद को एक “साजिश” बताया और कहा कि कुरमी जबरन आदिवासी बनने की कोशिश कर रहे हैं। अलविन लकड़ा ने कहा कि आदिवासी जन्म से होते हैं, किसी को बनाकर आदिवासी नहीं बनाया जा सकता। वहीं, प्रवीण कच्छप ने कहा कि कुरमी न कभी आदिवासी थे और न भविष्य में माने जाएंगे। केंद्र सरकार और टीआरआइ ने भी उनकी मांग को खारिज किया है।


आंदोलन और तेज करने की चेतावनी
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह रैली केवल सांकेतिक है, इसका मकसद आदिवासी समाज को जागरूक करना है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कुरमी समाज को एसटी दर्जा देने की कोशिश की गई, तो आंदोलन और उग्र होगा। रैली में रुपचंद केवट, बिगलाहा उरांव, आदिवासी विस्थापित मोर्चा अध्यक्ष राहुल उरांव, सुभानी तिग्गा, गैना कच्छप, अमित गाड़ी, बुड़ु धर्म गुरु एतवा उरांव उर्फ मनीष तिर्की, नवीन तिर्की, कैलाश तिर्की, मनोज उरांव, सुरज टोप्पो समेत कई संगठन प्रतिनिधि और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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