द फॉलोअप डेस्क
हेमंत सरकार द्वारा 26 हजार एक शिक्षकों की नियुक्ति के विज्ञापन निकाला है। इस पर भाजपा विधायक भानु प्रताप शाही ने हेमंत सरकार पर हमला किया है। शाही ने कहा है कि मुख्यमंत्री में हिम्मत है तो शेर की जनता के सामने आएं और अपने सरकार की स्थानीय और नियोजन नीति को स्पष्ट करें। नहीं तो जनता समझ चुकी है कि ये मिट्टी का शेर है जो बार-बार पीछे मुड़कर भाग जाता है।

राज्य के लोगों को दिया धोखा
भानू प्रताप ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया है कि 1932 उनकी पार्टी का मुद्दा है। कोई संकल्प नहीं। झामुमो राज्यहित से जुड़े गंभीर सवालों को केवल मुद्दा के रूप में जिंदा रखना चाहती है। राज्य सरकार जनता को धोखा देते हुए 60/40 की नीति पर अमल करते हुए राज्य से बाहर के लोगों के लिए दरवाजा खोल चुकी है।

पारा शिक्षकों को दिया धोखा
शाही ने कहा कि अपने घोषणा पत्र में पारा शिक्षकों को नियमित करने की बात हेमंत सोरेन ने कही थी। हजारों पारा शिक्षकों को हेमंत सरकार ने केवल धोखा दिया है। साढ़े तीन वर्षों में इस सरकार ने केवल पारा शिक्षकों को नाम बदलकर सहायक शिक्षक करने के अलावा कुछ नहीं दिया। आज तक इनके वेतनमान की घोषणा नहीं की गई है।
टेट पास के शर्त से प्रशिक्षित युवा निराश
शाही ने कहा कि विज्ञापन में केवल टेट पास युवक-युवतियों को ही आवेदन करने की शर्त लगाई है। जबकि राज्य में 2016 में हुई टेट परीक्षा के बाद अबतक 7 से 8 लाख युवा बीएड, बीटी का प्रशिक्षण ले कर वेकेंसी की प्रतिक्षा कर रहे हैं। लेकिन आज के विज्ञापन में केवल टेट पास का शर्त लगाने के कारण इनके उम्मीदों पर पानी फेरा गया है। पिछली सरकार में प्रतिवर्ष टेट परीक्षा आयोजित करने के नियम का अनुपालन हेमंत सरकार ने नहीं किया। एक तरफ टेट परीक्षा आयोजित नहीं हुई वहीं दूसरी ओर वेकेंसी में टेट की बाध्यता कर दी गई। युवाओं को नौकरी में समानता के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।

बेरोजगार युवक निराश
उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं इस सरकार ने जारी विज्ञापन में महिलाओं केलिए 50% सीट आरक्षित किए जाने के प्रावधान का भी उल्लंघन किया है। साथ ही विज्ञापन में वेतनमान और ग्रेड पे को भी आधा कर दिया गया है। कहा कि कई क्षेत्रीय भाषाओं में टेट उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को प्रकाशित विज्ञापन में नही जोड़ा गया है। जिससे हजारों की संख्या में ऐसे बेरोजगार युवक निराश हैं।
नियोजन में भी तुष्टिकरण
शाही ने कहा कि हेमंत सरकार एक तरफ टेट पास अभ्यर्थियों का अल्पसंख्यक विद्यालयों में सीधी नियुक्ति कर रही है। वहीं सामान्य सरकारी विद्यालयों में टेट पास के लिए परीक्षा का शर्त लाद रही है। जिससे नियोजन में भी सरकार का तुष्टिकरण उजागर हुआ है। मुख्यमंत्री अपने भाषणों में प्रतियोगिता परीक्षा का रिजल्ट जारी कर ने वालों को जेल भेजने की बात करते हैं। तो उन्हे बताना चाहिए की इस बहाली के रिजल्ट का क्या हश्र होगा।

भाजपा युवाओं की आवाज हर प्लेटफार्म पर उठाती रहेगी
शाही ने कहा कि हेमंत सरकार जबतक स्थानीय और नियोजन नीति स्पष्ट नहीं करेगी तबतक भाजपा इस ठगबंधन की कथनी और करनी के अंतर को लोकतांत्रिक तरीके से सभी प्लेटफार्म पर जोरदार तरीके से उजागर करती रहेगी।
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