रांची
पश्चिम बंगाल में भाजपा को मिली प्रचंड जीत को लेकर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के दिए गए एक बयान भाजपा कार्यकर्ताओं के 'लहू' से सींचा गया है बंगाल का कमल पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि भाजपा अब राजनीतिक मुद्दों और जनहित के सवालों पर जवाब देने की स्थिति में नहीं बची है, इसलिए वह “खून, शहादत और डर” की भावनात्मक राजनीति कर लोकतंत्र को कमजोर करने का काम कर रही है। सिन्हा ने कहा कि बंगाल की जनता का अपमान करना और हर चुनावी जीत को हिंसा तथा नफरत की कहानी में बदल देना भाजपा की पुरानी रणनीति रही है।

हिंसा और षड्यंत्र का नैरेटिव
अगर भाजपा को वास्तव में लोकतंत्र और कार्यकर्ताओं की इतनी चिंता होती, तो देशभर में विपक्षी नेताओं पर केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग, चुनी हुई सरकारों को गिराने और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने की राजनीति बंद करती। कांग्रेस ने कहा कि भाजपा यह बताये कि आखिर क्यों हर उस राज्य में, जहाँ उसे राजनीतिक चुनौती मिलती है, वहां वह लोकतांत्रिक जनादेश को स्वीकार करने के बजाय हिंसा और षड्यंत्र का नैरेटिव खड़ा करने लगती है। पश्चिम बंगाल की जनता ने कई बार भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को नकारा है और अब भाजपा “बलिदान” की आड़ लेकर सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रही है। उन्होंने ने कहा कि भाजपा नेताओं को यह भी याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र किसी एक दल की जागीर नहीं है। देश में सबसे अधिक राजनीतिक हत्याएं, सामाजिक तनाव और संस्थागत हमले भाजपा शासनकाल में बढ़े हैं। ऐसे में दूसरों पर लोकतंत्र की सीख देना भाजपा की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।

भाजपा का रवैया हमेशा अवसरवादी
कांग्रेस ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भाजपा का रवैया हमेशा अवसरवादी रहा है। जब परिणाम उनके पक्ष में हों तो संस्थाएं महान और जब जनादेश खिलाफ हो तो वही संस्थाएं कठघरे में खड़ी कर दी जाती हैं। पार्टी ने अंत में कहा कि जनता अब भावनात्मक भाषणों से नहीं, बल्कि महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की बदहाली और सामाजिक सौहार्द जैसे मुद्दों पर जवाब चाहती है। भाजपा को “शहादत की राजनीति” छोड़कर जनता के असली सवालों पर जवाब देना चाहिए।