द फोलोअप/ रांची
झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से कई सवाल किए। उन्होंने राज्य की पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था में विवादित अधिकारियों की तैनाती को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। मरांडी ने कहा कि झारखंड में ईमानदार और बेदाग अधिकारियों की कोई कमी नहीं है, फिर भी महत्वपूर्ण, संवेदनशील और भ्रष्टाचार जांच जैसे पदों पर आरोपों से घिरे अधिकारियों को ही क्यों बिठाया जाता है।
मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM जी से चंद चुभते सवाल...
— Babulal Marandi (@yourBabulal) August 21, 2026
- झारखंड में ईमानदार और बेदाग पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों की कमी नहीं है। फिर क्या वजह है कि महत्वपूर्ण, संवेदनशील और मालदार पदों के साथ-साथ भ्रष्टाचार की जांच जैसी जिम्मेदारियों पर भी विवादित और आरोपों से घिरे अधिकारियों को…
डीजीपी पद पर यूपीएससी की सिफारिशों की अनदेखी
मरांडी ने पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सिर्फ एक अधिकारी को छोड़कर यूपीएससी से अनुशंसित किसी भी अधिकारी को डीजीपी नहीं बनाया गया। जिस एक अधिकारी को पद दिया गया, उसे भी समय से पहले हटा दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिल भारतीय सेवा के नियमों को दरकिनार कर एक के बाद एक सेवानिवृत्त अधिकारियों को ही डीजीपी पद पर बनाए रखने की नौबत आई है। सवाल यह है कि क्या डीजीपी का पद अब संवैधानिक जिम्मेदारी न रहकर राजनीतिक कृपा का पद बन गया है।
राजनीतिक दबाव और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता
मरांडी ने चेतावनी दी कि जब किसी अधिकारी को लगे कि उसकी कुर्सी कानून से नहीं बल्कि सत्ता की कृपा से सुरक्षित है, तो वह कानून के बजाय राजनीतिक आकाओं के दबाव में काम करने को मजबूर हो जाएगा। उन्होंने सीआईडी और एसीबी जैसी जांच एजेंसियों का जिक्र करते हुए कहा कि अगर इनकी कमान विवादित अधिकारियों के हाथ में रहेगी तो जनता उनकी निष्पक्षता पर कैसे भरोसा करेगी।.jpeg)
पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त करने की अपील
मुख्यमंत्री से अपील करते हुए मरांडी ने कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन फैसलों का हिसाब इतिहास जरूर रखता है। पुलिस किसी सरकार या नेता की निजी जागीर नहीं, बल्कि संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह संस्था है। उन्होंने आग्रह किया कि अभी भी समय है—पुलिस को राजनीतिक दबाव से मुक्त किया जाए, ईमानदार अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाए और कानून को सत्ता का गुलाम नहीं बल्कि सत्ता से ऊपर रखा जाए। अंत में मरांडी ने चेतावनी दी कि वरना इतिहास पूछेगा कि आपने झारखंड को कानून से चलने वाला राज्य छोड़ा था या राजनीतिक कृपा और भय से चलने वाला पुलिस तंत्र।