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कांग्रेस ने मिशनरी के सहयोग से आदिवासियों को छला, बदली डेमोग्राफी चिंताजनक- बाबूलाल मरांडी

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द फॉलोअप डेस्क, रांची:
बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पार्टी पर मिशनरियों के सहयोग से आदिवासियों के साथ छल करने का आरोप लगाया। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आजादी के साथ ही अलग झारखंड राज्य की मांग उठने लगी थी, लेकिन कांग्रेस ने धूर्तता की ओर  इस मांग को नजरअंदाज किया। जयपाल सिंह मुंडा, कार्तिक उरांव और शिबू सोरेन का उल्लेख करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पार्टी पर आंदोलनों को खरीदने और उनका दमन करने का आरोप लगाया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि शुतुरमुर्ग की तरह सिर छुपा लेने से शिकारी आएगा और मुर्गे का शिकार करके चला जाएगा। 

कांग्रेस पर आंदोलनों को खरीदने का आरोप
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जयपाल सिंह मुंडा के मुर्गा छाप का शिकार कांग्रेस पार्टी पहले कर चुकी है और यही खेल आज  भी बदस्तूर जारी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का सिद्धांत शुरू से ही आदिवासी के नाम पर चिल्लाने और उन्हें  हाशिए पर धकेलने की रही है। मौजूदा परिस्थितियों को खतरनाक बताते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासियों की मौजूदा स्थिति के लिए कौन जिम्मेदार है, इसकी चर्चा होनी चाहिए। 

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संविधान प्रदत आदिवासियों का हक-अधिकार प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सुरक्षित है। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार के  साथ किसी को छेड़छाड़ करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची में  आयोजित आदिवासी महारैली में शामिल होने के लिए आर्च बिशप पत्र जारी करते हैं।  बाबूलाल मरांडी ने दावा किया कि रैली में नहीं जाने पर आदिवासियों को 100 से 500 रुपये तक जुर्माना वसूलने की धमकी दी गई। मिशनरियों के इस कृत्य पर नाराजगी जाहिर करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा कि आदिवासियो को बरगलाने का खेल बर्दाश्त से बाहर की चीज है। 

सुनियोजित साजिश के तहत डेमोग्राफी बदलाव
बाबूलाल मरांडी ने सुनियोजित साजिश के तहत डेमोग्राफी बदलाव का  आरोप लगाते हुए कहा कि इस पर मिशनरी, कांग्रेस  और राज्य सरकार चुप है। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि संताल परगना में डेमोग्राफी बदलाव भविष्य के लिए चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने कहा कि आदिवासी इस दिशा में नहीं सोचेंगे  और सरकार विचार नहीं करेगी तो जनसंख्या का आंकड़ा चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि आदिवासियों के सामने भीषण संकट खड़ा होने वाला हैय़  उन्होंने राज्य सरकार पर  वोट की राजनीति की खातिर चुप रहने का आरोप लगाया। 

बाबूलाल मरांडी ने डेमोग्राफी के आंकड़े पेश किए
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 1951 में आदिवासियों की आबादी  35.38 प्रतिशत थी जो 2011 में घटकर 26.20 प्रतिशत रह गई। वहीं मुस्लिम आबादी 8.9% से बढ़कर 14.53 प्रतिशत हो गई। ईसाई की आबादी में नहीं के बराबर अंतर हुआ। 1951 में सनातनियों की कुल आबादी 87.79% थी जो 2011 में घटकर 81.17% रह गई। उन्होंने कहा कि अगर इसी रफ्तार से आदिवासियों की आबादी घटी तो 2051 आते आते आदिवासियों की आबादी 22.21% रह जाएगी, वही सनातनियों की आबादी घटकर 76.88% रह जाएगी, जबकि मुस्लिम 19% हो जाएगा।

उन्होंने संथाल परगना में आदिवासी आबादी के घटते प्रतिशत और मुस्लिम आबादी की वृद्धि का भी आंकड़ा के साथ मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी और दलित को संविधान में आबादी के अनुपात में हक और अधिकार प्राप्त होता है, इसलिए इस लिहाज से यह बड़े संकट की आहट है। राज्य  सरकार को इसकी कतई चिंता नहीं है। 

संताल परगना में बाबूलाल मरांडी को किसकी चिंता
बाबूलाल मरांडी ने आदिवासी कल्याण समिति पाकुड़ का एक पत्र प्रस्तुत करते हुए कहा कि कैसे संताल परगना में आदिवासियों की रैयती जमीनों पर कब्जा कर उस पर बहुमंज़िला भवन, कारखाना, मस्जिद , मदरसा आदि बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी कल्याण समिति की ओर से मुख्यमंत्री सहित केंद्र और अन्य स्थानों पर भेजे गए पत्र में पाकुड़ के कई इलाकों में फर्जी दान पत्र के जरिए आदिवासी जमीन पर कब्जे की बात कही गई है। इस पत्र में कई जगहों का जिक्र करते हुए बांग्लादेशियों के द्वारा जमीन लूट की शिकायत करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि बांग्लादेशियों द्वारा कई मोहल्लों को साफ कर दिया गया है। अभी झारखंड में तो कांग्रेस और jmm की सरकार है। मुख्यमंत्री को जांच करके बताना चाहिए कि मामले में क्या कार्रवाई हुई। 
 

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